Friday, December 16, 2016

मुखड़े पर मुस्कान थिरकती

मुखड़े पर  मुस्कान थिरकती


केश रेशमी लहराते से 
बलखाती है चाल नशीली,
नयनों में है इक स्वप्न सजा है 
मुखड़े पर  मुस्कान थिरकती !

बड़ी चुलबुली नटखट बाला 
मस्ती रग-रग में बसती है,
संग सखियों के मौज मनाती 
बात-बात पर वह हँसती  है !

सुखद यात्राएँ करवाती 
स्वयं घूमने की शौक़ीन,
गीत बसे अधरों पर सुंदर 
खाती खुशियों की नमकीन !

माँ, पापा, बहना की प्रिय है 
दादा-नाना जी को गर्व है,
मासी, बुआ, चाची सबका 
 आशीष सदा मिलता है !

जन्मदिवस पर लो दुआएँ 
जीवन खिले गुलाबों जैसा,
नए वर्ष में मिल जाएगा  
साथी कोई ख्वाबों जैसा !






Saturday, December 10, 2016

ख़्वाब कई बन्द पलकों में



ख़्वाब कई बन्द पलकों में 

दुबली-पतली सी इक बाला 
मीठी बोली, रंग सांवला 
शिक्षा अब पूरी होने को 
जॉब  ढूंढती बढ़िया वाला !

डिजाइनर वस्त्र पहनती 
केश बनाती है हर बार,
पिक्चर, मॉल घूमने जाती 
बड़ी अदा से हो तैयार !

घर में छोटी, बड़ी लाडली 
 अति प्रिय भाई-बहनों की,
मामा, मासी सभी चाहते 
 नाज उठाते माँ-पापा भी !

ख़्वाब कई बन्द पलकों में 
 आयी बेला सच करने की,
निज पैरों पर शीघ्र खड़ी हो 
अंतर की शक्ति तोलगी !

जन्मदिवस पर ढेर बधाई 
सबका आशीर्वाद समेटो,
स्वस्थ सदा,आत्म तुष्ट हो 
प्यारी सी मुस्कान बिखेरो !





Sunday, December 4, 2016

प्रीत ही भाषा दिलों की

मुकेश और गीतांजलि के लिए

दशक बीते संग चलते
हमसफ़र हम जिंदगी के,
प्रीत ही भाषा दिलों की
पाठ सीखे बन्दगी के !

इश्क अपना फलसफ़ा है
डोलती नैया मनों की,
घर बना सारा जहाँ यह
तोड़ डालीं  हदें सारी !

रब बसाया दिल में जब से
एक दूजे में झलकता,
बेटियों पर भी लुटाया
प्रेम अंतर में पनपता !

पिता का है हाथ सिर  पर
स्नेह का बन्धन अनोखा,
धार बहती शांति रस की
खुला उर में इक झरोखा !

सुन रहा अस्तित्त्व सारा
दे रहे हम भी दुआएँ,
साथ यूँही चले जन्मों
जिंदगी यूँ मुस्कुराये !



Friday, December 2, 2016

जन्मदिवस पर यही दुआएँ

प्रिय आराधिका के लिए
जन्मदिवस पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

दोहरा बदन रेशमी केश
कद ऊँचा डिजाइनर वेश,
मीठी बोली प्यारी बातें
फैशन का देती सन्देश !

पापा के है दिल की जान  
करती है उनका सम्मान,
घर पर या कालेज में रहे
कहना सदा ही उनका मान  !

जैकेट, टॉप, पैंट सब सिलती
घूम-घूम कर फैब्रिक चुनती,
चांदनी चौक से ला मैटीरियल
बंगलूरू में धूम मचाती !

लिखने  की भी कला खिली है
ब्लॉग की  ड्यूटी एक  मिली है,
डांस क्लास में नियमित जाती
आदत यह तो एक भली है !

साइनस ने किया हैरान
एंटीबायोटिक से परेशान,
कभी विटामिन्स, कभी कैल्शियम
सेहत का रखती है ध्यान !

कालेज डे है  जन्मदिवस पर
परीक्षाएँ खड़ी  हैं सर पर,
फ्रेंड्स के संग पार्टी होगी
संगीत के गूंजेंगे स्वर !

गोवा का फिर होगा टूर
बजट में रहना है जरूर,
फिर तो मनेंगी खूब छुट्टियां
दिल्ली नहीं रहेगी दूर !

इसी तरह तुम बढ़ती जाओ
कर परिश्रम पढ़ती जाओ,
जन्मदिवस पर यही दुआएँ
सक्सेस सीढ़ी चढ़ती जाओ !

 

Wednesday, November 30, 2016

निज जीवन के बने सारथि

जन्मदिन पर शुभकामनायें 

उर में दीप्त प्रेम का बालन 
कदमों में हैं अनगिन राहें,
मधुस्मित अधरों पर रहता है 
है अनन्त की ओर निगाहें !

निज जीवन के बने सारथि 
प्रेरित किया सदा बिटिया को,
मननशील, कर्मठ, समर्पित 
दें सहयोग सदा दुनिया को !

स्वच्छता के बने हैं हामी 
सुंदर सा घर-बार सजाया,
स्मृति गुहा में सदा बसी वह 
दशकों जिसने साथ निभाया !

जन्मदिवस यह याद दिलाता 
कितने मोड़ अभी शेष हैं,
नई मंजिलें राह देखतीं 
उत्सव भी कुछ  जो विशेष हैं !

Tuesday, November 29, 2016

राजकुमारों सा पलता है


प्रिय आकाश के लिए 
पहले जन्मदिन पर शुभकामनाओं सहित 

गोल गंदुमी प्यारा मुखड़ा 
बड़ी-बड़ी सी मनहर आँखें, 
लगता भोला देवदूत सा 
कोमलता, सुंदरता पाँखें !

शान बढ़ायी  सारे घर की 
दे रोहन को 'दादा' का मान,
दादी, नानी की गोदी में 
फबता जैसे उनकी जान !

है नन्हा सा दुनिया घूमे 
विश्व नागरिक बना अभी से,
राजकुमारों सा पलता है 
मिलें दुआएं सदा सभी से !

जन्मदिवस पहला पहला है 
माँ के दिल में लड्डू फूटें,
हम भी देते बहुत बधाई 
मासी, मामा के  संग मिलके !

Thursday, November 3, 2016

जहाँ रहो खुशियाँ ही बिखेरो

जन्मदिवस पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ


नन्हा अभिनव था गोदी में
जब हम पहली बार मिले थे,
पढ़ ली थी आँखों की भाषा
दिल भी अपने बहुत खिले थे !

सँग-सँग कितनी शामें काटीं
मुस्कानों सँग बाटीं बातें,
जंगल घूमे, मनी पिकनिकें
नदियों के पानी में झाँके !

सिक्किम की वह मधुर यात्रा
यादें दार्जलिंग की सांझी,
धुर दक्षिण की रेल यात्रा
कितनी दिल में पुलक जगाती !

सहज, सरल स्वभाव तुम्हारा
शांत हृदय और तीव्र मेधा,
न कोई शिकवा न ही अपेक्षा
जो भी मिले, संतुष्ट सदा !

सुख-दुख दोनों में सम रहतीं
बच्चों को संस्कार दिये हैं,
आज याद आ रहीं सारीं बातें
अनुपम जो उपहार दिये हैं !

सदा रहोगी तुम इस दिल में
जब तक जीवन है यह शेष,
जहाँ रहो खुशियाँ ही बिखेरो
‘विभा’ तुम हो बहुत विशेष !


Wednesday, October 19, 2016

भाभीजी की पुण्य स्मृति में



प्रिय सुमन भाभीजी के लिये

(जो आज हमारे मध्य नहीं हैं, किन्तु जो सदा-सदा  हमारे दिलों में रहेंगी.) 

एक रेलवे कॉलोनी है, मुग़लसराय की गलियों में,
वहीं पली, बढ़ीं, पढीं थीं, ब्याही गयीं बनारस में

भरे घर में आयीं भाभी, सँग भईया के फेरे डाल
देवर-ननद, सास-ससुर सब, हुए बहू पाकर निहाल

सीतापुर, सहारनपुर में, कुछेक बरस बिताए फिर
राजधानी में बना आशियाँ, जनकपुरी जा पहुंची फिर

हरि नगर में चंद दिनों तक, रौनक भी फैलाई थी
स्थायी आवास को लेकिन, कृष्ण पुरी ही भायी थी

हंसमुख और मिलनसार भी, सजना-धजना बहुत है भाता
बातों में होशियार बड़ी हैं, पाकशास्त्र की भी हैं ज्ञाता

दोहरा बदन मगर फुर्तीली, भाभी जिनका नाम सुमन है
प्यारी माँ हैं, प्रिया सजीली, बहुत पुराना यह बंधन है

गीत सुनातीं झूम-झूम के, बड़े भाव से पूजा करतीं
कॉलोनी में सबसे मिलकर, सारे पर्व मनाया करतीं

जन्म दिन फिर-फिर आता है, कुछ भूली सी याद दिलाने
सुख-दुःख तो आते जाते हैं, आये हैं हम बस मुस्काने



Tuesday, September 27, 2016

जन्मदिवस पर

प्रिय भांजी के लिए जन्मदिन की ढेरों बधाई सहित


एक बालिका भली भली सी
मिश्री की हो एक डली सी,
प्यारी सी मुस्कान बिखेरे
ज्यों बेला की एक कली सी !

सखियों में भी लोकप्रिय है
एडवेंचर की शौक़ीन साहसी,
मछली सी लहरों से खेले
दिल में चाहत कुछ करने की !

कलाकारा वह जन्मजात है
अभिनय सहज ही घट जाता,
माँ-पापा की बड़ी दुलारी
बहना की भी आंख का तारा

स्वप्न सभी सच होंगे उसके
दिल में जोश दूरदृष्टि भी,
जन्मदिवस यह याद दिलाता
मंजिल और करीब आ गयी !


Monday, August 22, 2016

जन्मदिन पर स्नेह व शुभकामनाओं सहित

जन्मदिन पर स्नेह व शुभकामनाओं सहित

मस्ती का है नाम मुकेश
जल्दी उड़ गए जिसके केश
अपनाया गेरुआ वेश
देता सबको प्रेम संदेश !

भोग लगाता पंडित जैसा
बचपन में करता था पूजा
चुनरी ओढ़ नृत्य भी करता
कोई झिझक न कोई हूजा !

अनुज सभी का सबका स्नेही
दुल्हन भी अति सुंदर पायी
प्यारी सीं दो मिलीं बेटियाँ
किस्मत उसने अद्भुत पायी !

अपना समझ के काम करे वह
कर्मशील न थकना जाने
प्रमोशन भी पाए कितने
नाम बैंक में हर कोई जाने !

सुखमय हो जीवन का हर पल
जन्म दिवस पर तुम्हें बधाई
पिता की सेवा का अवसर पा
नित नयी तकदीर बनाई !

बढ़ते चलो साधना पथ पर
पालो भीतर शांति के स्वर
मिले शाश्वत का सान्निध्य
उड़ो गगन में लगा ध्यान पर !


Friday, August 19, 2016

जन्मदिन पर

सागर के जन्मदिन पर

यथा नाम तथा गुण पाया
सागर पार बसा है जाकर
सागर सा विशाल उर पाया !

छुटपन से ही था गम्भीर
लक्ष्य व साथी दोनों पाए
मेधा तीव्र, मानस भी धीर !

ओपेरा में शान बड़ी है
परिवार गौरवान्वित होता
उपलब्धियों की लगी झड़ी है !

गृह लक्ष्मी का रखता मान
पूछ-पूछ कर शॉपिंग करता
आखिर वह है हाईकमान !

सदा रहो खुश, मस्त सदा
जन्मदिन पर लो बधाई
हो जीवन में संतोष सदा ! 

Wednesday, August 10, 2016

जन्मदिवस पर शुभकामनायें

जन्मदिवस
पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ



खिला-खिला है चेहरा उनका
जैसे धूप सर्दियों वाली,
सदा प्रफुल्लित सदा विहँसती
गुलमोहर की जैसे डाली I

जीजाजी की छाया दीदी
जोड़ी उनकी बड़ी निराली
इतना विस्तृत घर-संसार
सचमुच बड़ी नसीबों वाली I

रामनाम की पी थी घुट्टी
अब तो घोट लिया ओशो भी
भीतर गहरा ज्ञान छिपाए
दिखती ऊपर भोली-भाली I

भाई-भाभी व बहनों का
सदा हाल लेतीं रहती वह
शादी वर्षगाँठ न भूलें
न तारीख जन्मदिन वाली

बच्चों से भी नहीं शिकायत
दूर विदेश बसे क्यों जाकर
सीखी कम्पयूटर की भाषा
फेसबुक की रीत निराली I

आसपड़ोस सभी से मिलती
सत्संग की महफिल सजाकर
पर्वो त्योहारों पर मिलजुल
समधियों संग होली दीवाली I

पाककला में बड़ी निपुण वह
है मेहमाननवाजी अद्भुत
अरवी, भिन्डी या पुलाव हो
या फिर कढ़ी पकोड़ों वाली I

आप बसीं हम सबके दिल में
दिल की धड़कन कहे यही
माँ सा प्यार सदा बाँटती
दीदी देहरादून वाली I

Wednesday, June 1, 2016

जन्मदिन की बधाई


जन्मदिवस पर शुभकामनाओं सहित 

चिरपरिचित लौह द्वार
छोटा सा लॉन और हरी घास (जिस पर बिखरे
ताजे झड़े, सूखे, पीले पत्ते
एक कलाकृति का आभास देते हैं)
से गुजरकर भव्य बैठक और
सभी सुविधाओं से सज्जित रसोईघर
चिप्स, अखरोट व फलों से करती स्वागत
देखते ही देखते वह  
व्यंजनों से सारी मेज सजा देती हैं
पिछला बरामदा है गवाह चाय की प्यालियों का
जब चलता है धाराप्रवाह सिलसिला बातों का
नाशपाती, लीची, अनार व अमरुद के वृक्षों से
छन-छन आती है हवा
नीचे सुंदर टाइल्स से सजा आंगन का फर्श
जो हवा के हल्के से झोंके से भर जाता है
बौर और नन्हीं पत्तियों से
इसे पार कर दायें व बाएं दो बगीचे
एक में लगे ईख के झुण्ड मन मोहते है
और वे उम्र व श्वेत वस्त्रों की परवाह किये बिना
अपने हाथों से उन्हें तोड़
दराती से स्वच्छ कर थमाते हैं
साथ ही आ जाती है ऊष्मा उनके अंतर की
तभी नजर आते है वृक्षों पर कूदते-फांदते वानर
शाक वाटिका में ऊधम मचाते
कंदमूल उखाड़ खाते
चाहते हैं आज मधुर शर्करा ईख की भी
उनके साथ बाँट कर खाईं
उस दिन ईख की मीठी गनेरियां
संध्या रहते गए टहलने
बड़ा सा अहाता और ढेरों कमरे
कमरों के अंदर से खुलते कमरे
देहरादून में है उनकी जागीर

सुबह-साँझ मंदिर में दियाबाती कर
भजन की स्वरलहरी का गुंजाना
अतिथियों को विदा करना प्रेम से
मन के पटल पर अंकित हो गया है...  

चांदी से चमकते केशों में झलकता है एक ठहराव
और परिपक्वता
आँखों में स्नेह उन मजबूत कंधों के लिये
जो उठा सकें उत्तरदायित्व

इस मिल्कियत का जिसकी नींव उन्होंने रखी है...