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Tuesday, September 3, 2024

घर आये थे अरमान लिए

भांजे के लिए जन्मदिन पर 


घर आये थे अरमान लिए 

फिर झेला क़हर बादलों का, 

जब घुस आया घर में पानी 

कोना भी बचा था न सूखा !


भाई-बहनों संग धूम मची 

फिर इक-इक कर सब विदा हुए, 

कुछ वक्त बिताने और साथ 

हम चारों फिर भी यहीं रहे !


माँ पापा की अब उम्र हुई 

देह शिथिल पर दिल अभी जवां, 

हँसते-हँसते हर कष्ट सहा

घर में सदा ख़ुशियों का समाँ !