Sunday, April 15, 2018

गुड्डू और फार्ज़ी का घर


गुड्डू और फार्ज़ी का घर





जहाँ बेरोकटोक बहती है हवा अपनत्व की,
 मित्र परिवार ही बन गए हैं और ....
परिवार का स्वागत मित्रों की तरह किया जाता है 
सभी भेद भुलाकर अपना बना लिया है कर्मियों को 
जहाँ दो मन एक हो गए हैं
समरसता का संगीत जहां हर पल गूँजता है
जहाँ समृद्धि का साम्राज्य है
भरा रहता है अन्न-जल का भंडार
विशाल है हृदयों का प्राँगण
प्रीत और समझ की बुनियाद पर टिका है जो
उस सुंदर घर पर सदा है कृपा अस्तित्व की
शामिल है दुआ जिसमें हर परिजन की !

Wednesday, January 31, 2018

जन्मदिन पर शुभकामनायें

प्रिय भांजी के लिए 

खुशदिल, सुंदर, मेधावी भी  
जीवन पथ पर बढ़ती जाती,
खट्टे-मीठे अनुभव लेकर 
अपनी झोली भरती जाती !

लहराते केश कांधों पर 
उर में कितने ख्वाब पनपते,
मुखड़े पर है चमक अनोखी
उम्मीदें भर कदम थिरकते ! 

बड़ी बहन भी एक सखी भी 
लावण्या के साथ सदा है,
माँ-पापा को गौरव उस पर 
कुदरत से भी प्रेम बड़ा है ! 

सदा केन्द्रित रहना स्वयं में 
कदम न कभी उखड़ने देना,
जीवन इक उपहार सा मिला 
आदर देकर इसे खोलना ! 

यही दुआएं हम देते हैं 
नजरें कभी न धूमिल होयें, 
सदा पूर्ण हों स्वप्न तुम्हारे 
उगें पुष्प जो तुमने बोये !

Thursday, June 1, 2017

जन्मदिन पर शुभकामनायें

आदरणीय व प्रिय दीदी के जन्मदिन पर
 ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ



सदाबहार खिली मुस्कानें, दूर विदेश हैं पास दिल के
आभामय करते मुखड़े को, घूँघर केश श्वेत पूनी से !

उर प्रेम से ओतप्रोत है, टिक टाक्क की उन्नति चाहतीं
  अंग्रेजी या नार्वेजियन, सभी खबर ही शेयर करतीं !

रोहन व आकाश की दादी, भारत की गर्मी भी भाती
सिडनी के शीतल मौसम में, घंटों उनके साथ खेलतीं !

हर सुख-दुःख दिन-रात घड़ी हर, जीजाजी का साथ निभातीं
परिवार के सब सदस्यों से, दिल से नाता सदा जोड़तीं !

त्याग, साधना, परम ऊर्जा, मन में इन विषयों को गुनतीं
बाहर का जीवन लीला है, भीतर ज्योति अखंड जलातीं !

जन्मदिवस पर यही प्रार्थना, सुखमय बने सारा परिवार
नेह धार मृदु बहती जाये, सहज सभी निभाएँ  व्यवहार !

पुनः रच दें अनुभूति बनी जो, नये वर्ष में यही अनुरोध
बँटे ऊर्जा पावन उर की, पाए जगत भी सुंदर बोध !
अनिता

२ जून २०१७ 

Wednesday, February 22, 2017

विवाह की स्वर्ण जयंती समारोह पर


आदरणीय व प्रिय श्रीमती कांता अरोड़ा व श्री ओम प्रकाश अरोड़ा  जी के विवाह की स्वर्ण जयंती समारोह पर स्नेह भरी शुभकामनाओं सहित


स्वप्न भरे अनगिन नयनों में 
अर्ध शतक तक संग चले वे,
एक अनोखी प्रेम कहानी 
ले हाथों में हाथ खड़े वे !


बचपन बीते थे लखनऊ में
मुल्तान में हुए थे जन्म,
चौक गली में रहती थीं वह
गली छोड़ ही बसे थे प्रियतम !


हाईस्कूल कर लिया डिप्लोमा
सीना, पिरोना कभी न छोड़ा
माँ ने पीले हाथ कर दिए 
कांता मित्रा बनीं अरोड़ा !


स्टेट बैंक ने दी आजीविका 
इंटर कर ही ज्वाइन किया,
कोटद्वार पहली नगरी थी 
फिर तो नहीं विश्राम लिया !


बारहवीं की परीक्षा दी तब
सुर ताल बसे थे मन में,
सुखद अति संयोग बने थे 
कांता जी के जीवन में !


तीन बेटियाँ घर में आयीं 
गूंज उठी प्यारी किलकारी,
नन्ही कलियों से सज गयी हो 
जैसे कोई आंगनवारी !


सच्चा जीवनसाथी पाया 
एकदूजे को सहयोग दिया,
आगे बढ़ने व पढ़ने की 
लिखने की भी दी प्रेरणा !


साथ-साथ ही दी परीक्षा
स्नातक की पायी उपाधि,
टूट-फूट की करें मरम्मत 
हाथों में काबलियत थी !


हो सिकन्दराबाद या मथुरा
पौड़ी, मेरठ या डिबाई,
हर मंजिल पर साथ-साथ थे 
सुन्दर इक  गृहस्थी बसाई !


सैंतीस साल की बैंक की सेवा
मैनेजर का था पद पाया,
घर बनवाने की बारी थी 
गाजियाबाद ही मन को भाया !


कवयित्री और समाज सेविका 
मधुर अति बोली उनकी,
जीवन में लक्ष्य सुन्दर थे 
भेंट सदा दी संस्कारो की !


तीन बेटियां और दामाद 
सबको है आप पर नाज,
नाती, नतिनी वारी जाते 
सबके दिल में लड्डू आज !


एक सुनहरा पल आया है
सुखद मिलन की बेला आयी,
दूर-पास के सभी प्रियजन 



मिलकर देते मधुर बधाई !

Friday, December 16, 2016

मुखड़े पर मुस्कान थिरकती

मुखड़े पर  मुस्कान थिरकती


केश रेशमी लहराते से 
बलखाती है चाल नशीली,
नयनों में है इक स्वप्न सजा है 
मुखड़े पर  मुस्कान थिरकती !

बड़ी चुलबुली नटखट बाला 
मस्ती रग-रग में बसती है,
संग सखियों के मौज मनाती 
बात-बात पर वह हँसती  है !

सुखद यात्राएँ करवाती 
स्वयं घूमने की शौक़ीन,
गीत बसे अधरों पर सुंदर 
खाती खुशियों की नमकीन !

माँ, पापा, बहना की प्रिय है 
दादा-नाना जी को गर्व है,
मासी, बुआ, चाची सबका 
 आशीष सदा मिलता है !

जन्मदिवस पर लो दुआएँ 
जीवन खिले गुलाबों जैसा,
नए वर्ष में मिल जाएगा  
साथी कोई ख्वाबों जैसा !






Saturday, December 10, 2016

ख़्वाब कई बन्द पलकों में



ख़्वाब कई बन्द पलकों में 

दुबली-पतली सी इक बाला 
मीठी बोली, रंग सांवला 
शिक्षा अब पूरी होने को 
जॉब  ढूंढती बढ़िया वाला !

डिजाइनर वस्त्र पहनती 
केश बनाती है हर बार,
पिक्चर, मॉल घूमने जाती 
बड़ी अदा से हो तैयार !

घर में छोटी, बड़ी लाडली 
 अति प्रिय भाई-बहनों की,
मामा, मासी सभी चाहते 
 नाज उठाते माँ-पापा भी !

ख़्वाब कई बन्द पलकों में 
 आयी बेला सच करने की,
निज पैरों पर शीघ्र खड़ी हो 
अंतर की शक्ति तोलगी !

जन्मदिवस पर ढेर बधाई 
सबका आशीर्वाद समेटो,
स्वस्थ सदा,आत्म तुष्ट हो 
प्यारी सी मुस्कान बिखेरो !





Sunday, December 4, 2016

प्रीत ही भाषा दिलों की

मुकेश और गीतांजलि के लिए

दशक बीते संग चलते
हमसफ़र हम जिंदगी के,
प्रीत ही भाषा दिलों की
पाठ सीखे बन्दगी के !

इश्क अपना फलसफ़ा है
डोलती नैया मनों की,
घर बना सारा जहाँ यह
तोड़ डालीं  हदें सारी !

रब बसाया दिल में जब से
एक दूजे में झलकता,
बेटियों पर भी लुटाया
प्रेम अंतर में पनपता !

पिता का है हाथ सिर  पर
स्नेह का बन्धन अनोखा,
धार बहती शांति रस की
खुला उर में इक झरोखा !

सुन रहा अस्तित्त्व सारा
दे रहे हम भी दुआएँ,
साथ यूँही चले जन्मों
जिंदगी यूँ मुस्कुराये !