Tuesday, June 27, 2023

जीवन से संतुष्ट दिख रहे

अंकल के लिए शुभकामनाओं सहित

 

मनअंतर में उल्लास भरा

मुखड़े पर है ज्ञान दमक,

केश धूप में नहीं पके हैं

दिखती है नयनों में चमक !

 

आरआरएस को बहुत मानते

सेवा भाव संस्था में है,

अटल जी से परिचय भी था

अनगिन यादें दिल में हैं !

 

नामरूप में कार्य किया था

फिर शिलांग भी कार्यक्षेत्र था,

अति भाया फिर नगर यह सुंदर

यहीं बसाया है डेरा !

 

सुंदर संगिनी भी साथ है

संतानें तीन पायी हैं,

जीवन से संतुष्ट दिख रहे

दुःख की यह घड़ी आई है !

 

किन्तु बन बरगद सी छाया

पुत्री को सहारा देते,

अपनी सहज प्रेम ऊर्जा

हर पल ही बिखराते रहते !

 

अनिता निहालानी

२० मई २०१५

 



प्यारी सी मुस्कान सदा

प्रिय भांजी के लिए जन्मदिन पर

 

याद तुम्हारी सदा बसी है

दिल में कुछ ज्यादा ही गहरी

चली गयी इस बार

देते हैं अब तुम्हें बधाई !

सुनो हजारों बार

प्यारी सी मुस्कान सदा

अब भी तुम बिखराती होगी

नृत्य, गीत के साथ साथ

अव्वल भी आती होगी

लहंगा चुनरी पहन के सुंदर

दर्पण में शर्माती होगी

माँ के मेकअप बॉक्स में गुपचुप

नजर भी दौड़ाती होगी

या फिर सारा वक्त तुम्हारा

पढ़ने में गुजर जाता है

होमवर्क के सम्मुख कुछ भी

और नजर नहीं आता है

जो भी हो तुम खुश रहना

सबसे हिलमिल कर रहना

नाना-नानी माँ पापा के

आंखो की पुतली हो तुम

भैया भी गर्व से कहते

उनकी बड़ी दुलारी हो तुम !

 


Monday, June 26, 2023

इक मुस्कान सदा मुखड़े पर

छोटी बहन के जन्म दिन पर


जन्मदिवस है खास इस बरस

सिर पर हाथ बड़े भाई का,

दूर से हम सब दें दुआएं

गीत बज रहा है बधाई का !

 

गया वर्ष खुशियाँ कई लाया

बिजनेस वुमन बनीं शान से,

डॉक्टर का कर्त्तव्य निभाया

होममेकर का जी जान से !

 

लेडिज क्लब की प्रेसिडेंट भी

घर, समाज दोनों से प्यार,

है विवेक जीवन में जिसके

क्यों होगी कभी उसकी हार !

 

प्यारी सी  दोनों पुत्रियाँ 

नये नये आयाम छू रहीं,

माँ-पिता के कदमों पर चल

जीवन में कई रंग भर रहीं !

 

इक मुस्कान सदा मुखड़े पर

दिल में चाहे हो मुश्किल,

जोश भरा कण-कण में तन के

निकट खड़ी ज्यों हर मंजिल !


Thursday, June 15, 2023

पुनर्मिलन


कॉलेज के मित्रों से पुनर्मिलन के अवसर पर 

हवा में घुलकर आयीं लौट 
कुछ यादें कैम्पस को छूकर, 
की पार चौथाई सदी, दी 
दिल के दरवाजे पर दस्तक !

पुनः सजीव हुए पल भर में 
बरसों बरस पुराने सपने, 
मिटीं दूरियाँ मीलों की हैं 
फेसबुक पर सभी से मिलके !

जब से दिल को खबर हुई है 
आँखें मिलने को हैं व्याकुल, 
इक दूजे को फिर देखेंगे  
उर भी सोच-सोच है आकुल ! 

जीवन के इस दीर्घ मार्ग पर 
कितने मोड़ कठिन भी आये, 
रुक जाने के. सुस्ताने के 
अंतर में थे भाव समाये ! 

जब भी पग कमजोर पड़े थे 
भीतर कोई जोश दिलाता, 
कुछ करने जग में आये हैं 
जज्बा यही  आगे बढ़ाता ! 

इतना श्रम करके जो पाया 
घटने कैसे देता उमंग, 
कितने सपने देखे थे मिल 
उन वर्षों की यादें थी सँग ! 

माँ, बाबा की सीख याद है 
जग में सबसे हिलमिल रहना, 
जो भी जितनी पायी  क्षमता  
जग को कुछ सुंदर कर जाना ! 

एक लगन आगे बढ़ने की 
एक आग भीतर जलती थी,  
कभी मिलेंगे, जो बिछड़े हैं 
भीतर-भीतर वह कहती थी ! 

आज वही अवसर अनुपम है
नूर झलक आया चेहरों पर, 
उम्र घट गयी हो पल भर में 
पांव में थिरकन, गीत जुबां पर ! 

खुद से मिलने का जी करता 
खुद में सबको पाया जो है, 
दूर नहीं अब पल मिलने का 
गीत मिलन का गाया जो है !