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Friday, August 21, 2026

सागर में इक लहर उठी

भाई के जन्मदिन पर 

ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 


मौसम वर्षा का अति भाया है 

पूरे परिवार के संग मिलकर इस बार 

जन्मदिवस अनोखा मनाया है !

नाती की मुस्कान ने उसमें चार चाँद लगाये 

समधियों का आगमन भी 

हर्ष का सबब बनकर आया है !

मनभावनी हरियाली में 

सुबह-शाम स्वच्छ रास्तों पर टहलना 

कभी-कभी दर्शनीय स्थलों पर 

भ्रमण करना 

जीवन अपने मनहर रूप में 

सम्मुख आया है !

तुम्हारे जन्मदिन पर 

हम सभी ने यह गीत गाया है !

सागर में इक लहर उठी……

सदा उस अनाम का आशीष पाया है ! 

 

Monday, August 17, 2026

सरल जीवन का सुख निरन्तर

जन्मदिन पर

ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 



जीवन के सातवें दशक में 

 बस थोड़ा-सा सुकून चाहिए,

थम गयी तीव्र जीवन की गति 

 अब उत्सव का न शोर चाहिए !

 

अब कदम कुछ धीरे चलते 

 शायद उम्र ने सिखा दिया है,

 जब जीवन स्वयं धीरे बीते 

जल्दी में रखा भी क्या है !


न दूर कहीं जाने की इच्छा

 न स्वादिष्ट व्यंजनों की चाह, 

 न नए वस्त्रों का आकर्षण,

 न दिखावे की कोई परवाह ! 


जो भी मिला वह है पर्याप्त

 जो है निकट वही है सुंदर,

 अब यह ह्रदय चाहता केवल 

 सरल जीवन का सुख निरन्तर !


कभी दुनिया जीतने की जो

इक ख्वाहिश दिल में पलती थी,

 आज बंद करके वह आँखें 

  भीतर ही उतरना चाहती !


 कुछ पल बैठ ध्यान में ख़ुद से

  मिलना अब अच्छा लगता है,

 मौन की उस शीतल छाँव में

 मन को अपना घर मिलता है !

अब शिकायतें कम हो गयी हैं

    अच्छे वैसे लोग हैं जैसे,

 कम हुई हैं अपेक्षाएँ भी

  लेना-देना नहीं किसी से !


जन्मदिवस पर आज हृदय में 

 कोई नहीं कामना जगती,

   शेष वर्ष संतोष में बीतें

 रहे प्रेम और मन में शांति !


 नित शांत भोर में भ्रमण करें 

साँस कृतज्ञता से भरी हो,

घर का हर कोना स्वच्छ हो 

हर शाम प्रार्थना-सी ढली हो !


स्वीकारा सुख से परिवर्तन 

उम्र बढ़ रही तो बढ़ने दो,

गरिमामय बने हर मुद्रा 

बालों में चाँदी उतरने दो !


  चेहरा नहीं, आईने में,

 जीवन का अनुभव देखना,

  धन्यवाद कहना है कल को 

नहीं दौड़ना अब बस चलना !

 

 पाना नहीं, केवल जीना है

नहीं बोलना अब सुनना है,

मन है शांत,
हृदय संतुष्ट   

जीवन के संग बहना है !

 

जब जीवन की संध्या आए,

 मुस्कुराते हुए कहना है,

“मैंने जीवन भरपूर जिया”,


शेष यहीं समर्पित करना है !

 

Thursday, July 30, 2026

जीवन को गढ़ती हैं श्वासें

प्रिय बहना के लिए 

जन्मदिन पर 

ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 


हँसता हुआ नूरानी चेहरा 

अनुशासन का बाँधा सेहरा,

बिटिया होगी अपने घर की 

 सरवर मन का थिर हो ठहरा !


जैसे ही अभिमान सताये 

अलगाव बढ़े, राज खोलती,  

सुख खिड़की से उड़ जाता है 

गुरुदेव की भाषा बोलती !


भक्तिभाव से अंतर पूरित 

जीवन का हर पल है सुंदर, 

नये-नये प्रोजेक्ट्स हाथ में 

नित  निभाये आनंद से भर !


जीवन को गढ़ती हैं श्वासें 

अंतर को पढ़ती है आत्मा, 

कदम-कदम पर फूल बोध के 

खिला ही देता परम आत्मा !


साक्षी का इक दीप जला है 

जिसकी आभा में खिलता मन,

सुर-संगीत व चित्रकला में 

सहज ही घटता नवीन सृजन ! 


एक परम उत्साह अनोखा 

किसी लोक से बहता आये, 

बन विवेक, सौंदर्य अनूठा 

जीवन वन को सरसा जाये !


सुख स्वरूप अब ख़ुद को जाना 

ध्येय बनाया उसे बाँटना, 

 शुभ भावों का एक वृक्ष बन 

अवांछनीय को नित छाँटना !

 

Sunday, July 26, 2026

जीवन इक अमोल अवसर है

पापा जी की दूसरी पुण्यतिथि पर 

विनम्र श्रद्धांजलि 


दो वर्ष बीते कहने को 

लगता है यह कल की बात, 

घेर आपको सब बैठे थे 

आने को थी अंतिम रात !


इधर-उधर की बातें करते 

कापी-कलम लिया हाथ में, 

अस्पष्ट सी लिखाई लेकिन 

थी स्पष्टता हर बात में !


चाय का घूँट वह अंतिम 

अंतिम था रात्रि का भोजन, 

अर्ध रात्रि को हाथ जोड़कर 

जैसे किया आख़िरी निवेदन !


कितने पाठ सिखा गया है 

शांतिपूर्ण था वह प्रस्थान, 

अंतिम घड़ी में था अधरों पर 

उसी परमशिव, ब्रह्म का नाम !


जीवन का हर पल पावन था 

मृत्यु भी ऐसी ही पायी, 

प्रिय पापाजी  सदा आपने  

सहज-सजग रह शांति पायी !


आज स्मरण आते हैं वे पल 

 मोबाइल पर की चर्चाएँ, 

जीवन इक अमोल अवसर है 

स्मरण आपका याद दिलाये !



Friday, July 3, 2026

जीवन इक अनमोल ख़ज़ाना

प्रिय भाभी के लिए 

जन्मदिन पर हार्दिक 

शुभकामनाओं के साथ 


हर सुबह चाय की इक प्याली 

भैया के हाथों मिलती है, 

वर्षों से क्रम यही चला है 

आँख भोर में जब खुलती है !


क़िस्मत वाली मँझली भाभी 

सुंदर घर में सब सुविधाएँ, 

दो-दो सहायिकाएँ आतीं 

सुपरविजन कर काम करायें !


होती उनकी रोज़  डस्टिंग 

 फ़र्नीचर नित चमचम करते,

इससे पूर्व न फ़ुरसत होती 

दोपहरी तक काम निपटते !


लंच पैक कर दें भाई को 

कर्मशील अब भी जो रहते, 

जाने वाले शीघ्र कनाडा 

तैयारी में रत  भी रहते !


 बिटिया के विदेश से भेजे 

उपहारों से सदन सजाती, 

सजग नागरिक बनी सदा ही 

ज़िम्मेदारी खूब निभातीं !


भक्ति भावना सुंदर  दिल में 

घर में मंदिर एक सजाया 

कालोनी  के मंदिर में भी 

सखियों से मिल भजन सुनाया 


जीवन इक अनमोल ख़ज़ाना 

लुटा रहा दिन-रात हर घड़ी 

सदा रहें स्वस्थ व सानंद 

हम सब देते हैं दुआ यही !



Friday, July 11, 2025

जीवन में इक लय व छंद है

आदरणीय जीजाजी के लिए 

 जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाओं सहित 


मुख पर संतोष भरी मुस्कान

बन गयी है आपकी पहचान, 

छोटी-बड़ी ज़रूरत का हर

दीदी-बच्चे रखते हैं ध्यान !


तन थक जाए कभी ज़रा सा 

 पर मन का हौसला बुलंद है, 

 वरदान मिला है दीर्घायु का

जीवन में इक लय व छंद है !


आँगन में बगिया मुस्काए,

 हर मौसम कुछ नया दे जाए,

 आम, लीची, लुकाठ, करी पात 

 नींबू, पुदीना सुरभि लुटाए !

 

भोर में पंछी गीत सुनाते 

घर भर देती मधुर गुंजार,

संबंधों में स्नेह बह रहा  

पोती-नातिनों की चहकार !


लोहड़ी, होली, या दिवाली 

हर उत्सव मिलकर मनाते

 ऑनलाइन खेलों के संग 

 शॉपिंग का भी लुत्फ़ उठाते !


जीवन जैसे शांत समंदर

 हर लहर कहे कितना सुंदर,

 साथ मिला जो सच्चा, पावन

 उससे ही पथ हुआ यह भावन !


 यही कामना हम सब की, हो 

जन्मदिवस हर साल निराला,

 रहें आप स्वस्थ और  सानंद 

 खुशियों का हो संग उजाला !




Monday, June 2, 2025

एक अदृश्य लोक से आतीं

आदरणीय व प्रिय दीदी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी 

शुभकामनाओं के साथ 


जीवन का जो मर्म जानतीं 

तृप्ति का जो धर्म जानतीं, 

बनी अजस्र प्रेम की धारा 

निष्काम जो कर्म जानतीं !


सदा प्रफ़्फुलित अंतर जिनका 

बेशर्त निज प्रेम लुटातीं, 

जीवन के इस आयोजन में 

रह असंग भूमिका निभातीं !


सत्य, प्रेम, ज्ञान के पथ पर 

हो नि:शंक वर्षों से बढ़तीं, 

एक अदृश्य लोक से आतीं 

किरणों को दामन में भरतीं !


ऐसे ही घर रहे आपका 

कृपा बरसती प्रकृति माँ की, 

फूलों जैसा खिला रहे मन 

लें बधाई इस पावन दिन की !



Sunday, January 26, 2025

साहस भरा हर श्वास में

माँ की पुण्य स्मृति को श्रद्धा सुमन 


उन्होंने हमें दिया जनम 

पोषण किया कर हर जतन, 

उस स्नेह ममता मूर्ति  को

कर याद हम करते नमन !


पढ़ती रहीं पढ़ाती भी 

बुनती सदा  सिखाती भी, 

साहस भरा हर श्वास में 

वह इक आत्मा स्वतंत्र थीं !


घूमीं बहुत पर्वत चढ़ीं 

दीपक जो छह जला गयीं, 

पिता संग माँ हर हाल में 

तृप्ति  का रस पिला गयीं  !


हम याद करते हैं उन्हें 

शुभ प्रेम अंतर में भरे, 

उन्हीं  रास्तों पर चल सकें 

जीवन से निज दिखा गयीं !



Thursday, June 15, 2023

पुनर्मिलन


कॉलेज के मित्रों से पुनर्मिलन के अवसर पर 

हवा में घुलकर आयीं लौट 
कुछ यादें कैम्पस को छूकर, 
की पार चौथाई सदी, दी 
दिल के दरवाजे पर दस्तक !

पुनः सजीव हुए पल भर में 
बरसों बरस पुराने सपने, 
मिटीं दूरियाँ मीलों की हैं 
फेसबुक पर सभी से मिलके !

जब से दिल को खबर हुई है 
आँखें मिलने को हैं व्याकुल, 
इक दूजे को फिर देखेंगे  
उर भी सोच-सोच है आकुल ! 

जीवन के इस दीर्घ मार्ग पर 
कितने मोड़ कठिन भी आये, 
रुक जाने के. सुस्ताने के 
अंतर में थे भाव समाये ! 

जब भी पग कमजोर पड़े थे 
भीतर कोई जोश दिलाता, 
कुछ करने जग में आये हैं 
जज्बा यही  आगे बढ़ाता ! 

इतना श्रम करके जो पाया 
घटने कैसे देता उमंग, 
कितने सपने देखे थे मिल 
उन वर्षों की यादें थी सँग ! 

माँ, बाबा की सीख याद है 
जग में सबसे हिलमिल रहना, 
जो भी जितनी पायी  क्षमता  
जग को कुछ सुंदर कर जाना ! 

एक लगन आगे बढ़ने की 
एक आग भीतर जलती थी,  
कभी मिलेंगे, जो बिछड़े हैं 
भीतर-भीतर वह कहती थी ! 

आज वही अवसर अनुपम है
नूर झलक आया चेहरों पर, 
उम्र घट गयी हो पल भर में 
पांव में थिरकन, गीत जुबां पर ! 

खुद से मिलने का जी करता 
खुद में सबको पाया जो है, 
दूर नहीं अब पल मिलने का 
गीत मिलन का गाया जो है ! 
 

Friday, November 11, 2022

जीवन से संदेश दे रहे

आदरणीय व पूज्यनीय पापाजी के लिए बावनवें

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 

​​

 अंतर-मन  अति है उत्साहित, हर दिन का स्वागत करें हँसकर 

दो अख़बारों के माध्यम से, दुनिया भर का लगता चक्कर !

 

बिस्तर लगा स्वयं नित  उठाते, ज़रा नहीं  प्रमाद है तन को

फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, आदि का, अच्छा ख़ासा  ज्ञान आपको !

 

राजनीति से दूर ही रहें,  भक्ति की महानता  बताएँ

नव तकनीक सीखने का गुर, अपने हाथों चाय बनाएँ   !

 

जीवन के हर रूप की कद्र, भारत  के प्रति प्रेम अपार 

वचनों में है सत्य झलकता, दिल पाया है अतीव उदार  !

 

छोटी-छोटी बातों का भी, रहता आया ध्यान बहुत  ही 

लम्बे जीवन का यही राज,  संतुलित चर्या, साफ़-सफ़ाई !

 

माँ भी समा गयीं हैं भीतर, उनका रोल सहज निभाते 

नाती-पोते,पुत्र-पुत्री  सँग,  नव  पीढ़ी पर ममत्व लुटाते !

 

पूर्ण सजग है दृष्टि आपकी, गहराई से जग को देखे

नज़रों से कुछ बच ना पाता,  जीवन से संदेश दे रहे !

 

धैर्य असीम, आस्था अपार, याददाश्त भी बहुत तेज है, 

बचपन मन में अब भी ताज़ा, उर्दू-फ़ारसी के शेर हैं !

 

ज्ञान का इक स्रोत है भीतर, जिसने थामा  है तन-मन को

करुणा , प्रेम, भरोसा झलके, मिसल बनाया है जीवन को !

 

अनिता 

८ नवम्बर २०२२