Showing posts with label प्रेम. Show all posts
Showing posts with label प्रेम. Show all posts

Friday, May 15, 2026

रिश्तों में संगीत बह रहा

प्रिय भांजी के लिए 

 जन्मदिन पर ढेर सारी

शुभकामनाओं के साथ 


जीवन में खुशियों की आहट 

कदम-कदम पर आती रहती, 

प्यारी सी  मुस्कान तुम्हारी 

आँगन में ज्यों गाती रहती !

  

बड़े हो रहे राजकुमार 

लालन-पालन किया प्रेम से, 

दादा-दादी साथ  हर कदम 

भरा हुआ घर  आशीषों से!


 पतिदेव विशेषज्ञ बने हैं,

 नाम कमाया है दुनिया में, 

सासु माँ ने केक बनाया 

प्रेम झलकता हर कृत्य में !

  

मेथी के पराँठों की खुशबू 

जैसे दिल में अपनापन हो, 

 रिश्तों में संगीत बह रहा 

सुनने वाला यदि कोई हो !


तुम भी रखती ध्यान सदा ही 

अंतर उमंग से भरा हुआ, 

 हर दिन ही उत्सव बन जाए

बस यही दे रहे तुम्हें दुआ ! 




Monday, June 2, 2025

एक अदृश्य लोक से आतीं

आदरणीय व प्रिय दीदी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी 

शुभकामनाओं के साथ 


जीवन का जो मर्म जानतीं 

तृप्ति का जो धर्म जानतीं, 

बनी अजस्र प्रेम की धारा 

निष्काम जो कर्म जानतीं !


सदा प्रफ़्फुलित अंतर जिनका 

बेशर्त निज प्रेम लुटातीं, 

जीवन के इस आयोजन में 

रह असंग भूमिका निभातीं !


सत्य, प्रेम, ज्ञान के पथ पर 

हो नि:शंक वर्षों से बढ़तीं, 

एक अदृश्य लोक से आतीं 

किरणों को दामन में भरतीं !


ऐसे ही घर रहे आपका 

कृपा बरसती प्रकृति माँ की, 

फूलों जैसा खिला रहे मन 

लें बधाई इस पावन दिन की !



Wednesday, January 8, 2025

प्रेम का आकाश

विवाह की वर्षगाँठ पर 

असीम है जैसे मेरा प्रेम 
तुम्हारे लिए 
वैसे ही तुम्हारा नहीं होगा 
यह मानने का कोई कारण तो नहीं  
वर्षों का साथ है पर अब भी 
कोई नयी बात पता चल जाती है 
ज़िंदगी रोज़-रोज़ कोई रहस्य 
खोलती जाती है 
अनंत है प्रेम का आकाश
उसके हज़ारों हैं रंग 
एक ही बात को कहने को
 हज़ारों हैं ढंग  
कोई छोटा सा इशारा ही 
काफ़ी है प्रेम के 
किसी न किसी आयाम को 
जतलाने के लिए 
नहीं चाहिये मन को कोई आश्वासन 
साथ होना ही काफ़ी है 
दिल का हाल 
बतलाने के लिए !


Tuesday, December 27, 2022

ज्योति ज्ञान की भर अंतर में



भांजी के लिए मंगनी पर हार्दिक शुभकामनाओं सहित


दिल पर लिक्खा नाम प्रिय का, मन ही मन कन्या मुस्काए

देख देख दर्पण में मुखड़ा, खुद से ही ज्यों शरमा जाये !

 

कृपा बरसती हो जिस घर में, प्रेमभाव का सदा हो वास

देवों का आगमन निश्चित, जहाँ कंचन-अशोक का निवास !

 

दोनों बहनें खुशी से झूमें, झोली भर-भर दें दुआएं,

मंगनी की शुभ रस्म हो रही, खुशी मनाने के दिन आये !

 

दी इक-दूजे को अंगूठी, देख-देख निहाल सब होते

मनों में उठती हैं हिलोरें, संबंधी आशीषें देते !

 

शुभ बेला, मंगलमय घड़ियाँ, सुखद सुहाने पल आए हैं,

पूर्ण हो गए, एक हुए जब, सपने जो देखे मिलजुल हैं !

 

इसी तरह हँसते मुस्काते, जीवन का सुंदर पथ गढ़ना

ज्योति ज्ञान की भर अंतर में, सबको सँग-साथ लिये बढ़ना !

 

प्रेम और सम्मान सदा हो, इक-दूजे का ध्यान सदा हो

नई-नई ऊंचाई पा लो, हर क्षेत्र में मान सदा हो !

 

कन्या-वर की यह शुभ जोड़ी, स्वयं ईश्वर ने है बांधी

प्रीत पुरानी है वर्षों की, पावन प्रेम से है रांधी

 

प्रणय यहाँ तक ले आया है, बंधे दोनों एक सूत्र में

गठबंधन यह जीवन भर का, संग-संग अब हर सुख-दुःख में


Friday, November 11, 2022

इक दूजे का साथ निभाकर

 प्रिय भांजी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 

 

दिल में  सुख  की गागर  फूटी, तन-मन को जो भिगो रही है 

ऐसे ही मुसकाती रहना, ज्योति प्रेम की बिखर रही है !

 

पावन  बंधन में बँधना है, अंतर में फुलझड़ियाँ फूटें

नयनों में नव  स्वपन सजे हैं, हर बाधा हर संकट छूटे !

 

जीवन पथ पर साथ निभाने, नया तराना मिल गाएँगे  

दिल से दिल तो मिले हुए हैं, दो कुटुम्ब  भी मिल जाएँगे !

 

कुछ अधिकार सहज मिलेंगे,  कुछ कर्त्तव्य निभाने होंगे 

 अग्निदेव  के फेरे लोगी, मिलकर कदम बढ़ाने होंगे !

 

सुंदर इक परिवार  तुम्हारा, अस्तित्त्व में आ जाएगा  

दोनों परिवारों का सदा ही, रिश्ता सम्मान बढ़ाएगा ! 

 

इस जीवन का पावन लक्ष्य, है मैत्री व साझेदारी 

सेवा व सहयोग, प्रेम से, अर्धांगिनी होती है नारी !

 

शिव के बिना शक्ति कहाँ है, शक्ति बिना शिव भी अधूरे 

इक दूजे का साथ निभाकर, दोनों के हों सपने पूरे !

 

मीठे बोल  सरल स्वभाव से, सबके मन में जगह बनाना 

भीतर छिपी  अनंत ऊर्जा, बिना थके बस बढ़ती जाना !


Saturday, January 9, 2021

प्रीत ही भाषा दिलों की

छोटे भाई-भाभी के लिए 
विवाह की वर्षगांठ पर 
दशक बीते संग चलते 
हमसफ़र हम जिंदगी के,
प्रीत ही भाषा दिलों की 
पाठ सीखे बन्दगी के !

इश्क अपना फलसफ़ा है 
डोलती नैया मनों की,
घर बना सारा जहाँ यह 
तोड़ डालीं  हदें सारी !

रब बसाया दिल में जब से 
एक दूजे में झलकता,
बेटियों पर भी लुटाया 
प्रेम अंतर में पनपता !

पिता का है हाथ सिर  पर 
स्नेह का बन्धन अनोखा,
धार बहती शांति रस की 
खुला उर में इक झरोखा !

सुन रहा अस्तित्त्व सारा 
दे रहे हम भी दुआएँ,
साथ यूँही चले जन्मों 
जिंदगी यूँ मुस्कुराये !


 

Friday, December 25, 2020

जन्मदिन पर कविता

 जन्मदिन पर 
ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ 
वाणी मधुर, सहज स्वभाव, मन में करूणा व प्रेम भरा है 
कोमल दिल से जाने कितना, अपनों  के हित नेह झरा है 

पौधा, पशु, कोई प्राणी हो, सबके बारे सदा सोचती 
घर-बाग़ दोनों को सजाया, नियमित योग साधना करती 

सुंदर वस्त्र सहेज कर रखे, आभूषणों से नहीं लगाव 
एक सादगी है जीवन में, नहीं जताती कोई अभाव 

जॉब के प्रति पूर्ण समर्पित, भोर से शाम ढले तक करती 
अधिकारी सन्तुष्ट हो जाते, तर्क सहित उन्हें समझाती

प्रिय के प्रति भी अतुल प्रेम है, मैत्री व आदर भी देती  
नहीं दिखावट, नहीं शिकायत, दो तन, इक मन होकर रहती  

केक, पेस्ट्री, कुकीज़ बनाए, कलात्मक आइसिंग सजायी   
थोड़ा सा ही अपने हित रख, बाकी मित्रों को भिजवाती

स्वप्न तुम्हारे सभी पूर्ण हों, माँ-पापा की आशीषें लो 
बढ़ो प्रगति की राह पर आगे, इसी तरह सदा मुस्काओ



 

Monday, July 1, 2019

भाभी के जन्मदिन पर



जन्मदिवस पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

छोटे केश सांवला मुखड़ा
प्यारी सी मुस्कान सजी है 
बड़े प्रेम से स्वागत करतीं
चाहे जितनी बार मिली हैं

बिटिया की हैं बनी सहेली
सदा साथ जीवन साथी के,
हर सुख-दुःख में बनीं सहारा
किया सामना बड़े जोश से !

एक से एक नया फर्नीचर 
संवरा-सजा सदा हर कमरा,
सौन्दर्य की बड़ी परख है
हो चादरें या फिर परदा !

देख-भाल कर चुनती हैं वह
ड्रेस सेन्स भी पाया खूब,
सखियों संग की किटी पार्टी
किस्सों से भी मचायी धूम !

माँ के आशीर्वाद मिले हैं
भाई-भाभी का भी दुलार,
बहना बसी सदा अंतर में
ससुराल में मिला है प्यार

जन्मदिन पर ढेरों बधाई
ऐसे ही सदा मुस्काएं,
स्वप्न सभी ही शीघ्र पूर्ण हों
हम सब देते यही दुआएं !

Monday, November 12, 2018

तुम दोनों का आना

तुम दोनों का आना


जैसे शीतल पवन झकोरा
सहला जाता.. कुछ दे जाता,
या फिर कोई  झरता झरना
भीनी सी फुहार बरसाता !

विमल प्रेम की धार बही थी  
मधुर मिठाई पकवान संग,
हर मुद्रा हर भाव हृदय का
बना प्रकाश.. भरा था आंगन !

आतिश बाजी से गगन रँगा 
जब गगनदीप उन्मुक्त उड़ा,
नये सुस्वादु व्यंजन, सज्जा
अतिथियों का आनंद बढ़ा,

बच्चों संग मित्र बन खेले
जीता उनको उपहारों से,
सबको एक नजर से देखा
बसा नहीं भेद कभी उर में !

तुम दोनों को प्रेम जोड़ता
ऐसे ही मुस्काते रहना,
ज्यों जन्मों के मीत मिले हों
एक हृदय दो तन हो रहना !

विवाह के बाद प्रथम बार दीपावली के अवसर पर जिनके यहाँ पुत्र और पुत्रवधू का आगमन 
हुआ, यह कविता उन सभी परिवारों को समर्पित है. 

Thursday, June 1, 2017

जन्मदिन पर शुभकामनायें

आदरणीय व प्रिय दीदी के जन्मदिन पर
 ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ



सदाबहार खिली मुस्कानें, दूर विदेश हैं पास दिल के
आभामय करते मुखड़े को, घूँघर केश श्वेत पूनी से !

उर प्रेम से ओतप्रोत है, टिक टाक्क की उन्नति चाहतीं
  अंग्रेजी या नार्वेजियन, सभी खबर ही शेयर करतीं !

रोहन व आकाश की दादी, भारत की गर्मी भी भाती
सिडनी के शीतल मौसम में, घंटों उनके साथ खेलतीं !

हर सुख-दुःख दिन-रात घड़ी हर, जीजाजी का साथ निभातीं
परिवार के सब सदस्यों से, दिल से नाता सदा जोड़तीं !

त्याग, साधना, परम ऊर्जा, मन में इन विषयों को गुनतीं
बाहर का जीवन लीला है, भीतर ज्योति अखंड जलातीं !

जन्मदिवस पर यही प्रार्थना, सुखमय बने सारा परिवार
नेह धार मृदु बहती जाये, सहज सभी निभाएँ  व्यवहार !

पुनः रच दें अनुभूति बनी जो, नये वर्ष में यही अनुरोध
बँटे ऊर्जा पावन उर की, पाए जगत भी सुंदर बोध !
अनिता

२ जून २०१७ 

Sunday, December 4, 2016

प्रीत ही भाषा दिलों की

मुकेश और गीतांजलि के लिए

दशक बीते संग चलते
हमसफ़र हम जिंदगी के,
प्रीत ही भाषा दिलों की
पाठ सीखे बन्दगी के !

इश्क अपना फलसफ़ा है
डोलती नैया मनों की,
घर बना सारा जहाँ यह
तोड़ डालीं  हदें सारी !

रब बसाया दिल में जब से
एक दूजे में झलकता,
बेटियों पर भी लुटाया
प्रेम अंतर में पनपता !

पिता का है हाथ सिर  पर
स्नेह का बन्धन अनोखा,
धार बहती शांति रस की
खुला उर में इक झरोखा !

सुन रहा अस्तित्त्व सारा
दे रहे हम भी दुआएँ,
साथ यूँही चले जन्मों
जिंदगी यूँ मुस्कुराये !



Friday, October 29, 2010

भुंईया दा

भुइयाँ दा

मन की अलबम के पृष्ठों को, जरा पलट कर देखा आज
उभरा हो सजीव दृश्य वह, गूंजी भीतर वह आवाज I 

पहला बेसिक कोर्स हुआ था, दुलियाजान हुआ रोमांचित
थी शुभो बनर्जी की विदाई, प्रतिभागी सभी थे पुलकित I

गीत आपने इक गाया था, सबके मन को जो भाया था
बंगलोर से आया मेरा दोस्त, दोस्त को सलाम करो I

ए. ओ. एल. का नन्हा अंकुर, आज पनप कर वृक्ष हुआ है
स्नेह जल से सींचा इसको, प्रेम आपने सदा दिया है I

भोला शंकर भोला गाते, कभी द्रवित हो माँ को बुलाते
भाव भरा आपका उर है, मीठे स्वर में भजन सुनाते I

सदगुरु की है कृपा आपपर, जीवन ऐसे सुखमय बीते
हर मुश्किल आसां हो जाये, जग को निज स्वभाव से जीतें I

एक और स्मृति अंकित है, पर्यावरण के प्रति समपर्ण
प्लास्टिक मुक्त हो शहर हमारा, सेवायें की अपनी अर्पण I

जगह-जगह बोर्ड लगवाये, प्लास्टिक के दोष गिनवाए
सोया लेकिन जन मानस है, अब भी न सचेत हो पाए I

लेकिन यह प्रयास आपका, दुलियाजान नहीं भूलेगा
यदि भविष्य में महल बना तो, नींव का पत्थर यही बनेगा I

ई. थर्टी सेवन की यादें, सबके दिल में बसी हुईं
आज विदा की इस बेला में, आंखें भी कुछ नम हुईं I

सदगुरु के प्रकाश में हम सब, पालें भीतर का आकाश
जग से जाएँ उससे पहले, दुखों से पालें अवकाश I