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Monday, June 2, 2025

एक अदृश्य लोक से आतीं

आदरणीय व प्रिय दीदी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी 

शुभकामनाओं के साथ 


जीवन का जो मर्म जानतीं 

तृप्ति का जो धर्म जानतीं, 

बनी अजस्र प्रेम की धारा 

निष्काम जो कर्म जानतीं !


सदा प्रफ़्फुलित अंतर जिनका 

बेशर्त निज प्रेम लुटातीं, 

जीवन के इस आयोजन में 

रह असंग भूमिका निभातीं !


सत्य, प्रेम, ज्ञान के पथ पर 

हो नि:शंक वर्षों से बढ़तीं, 

एक अदृश्य लोक से आतीं 

किरणों को दामन में भरतीं !


ऐसे ही घर रहे आपका 

कृपा बरसती प्रकृति माँ की, 

फूलों जैसा खिला रहे मन 

लें बधाई इस पावन दिन की !



Thursday, April 7, 2022

अधरों पर आनन्द रागिनी



जन्मदिन पर

शुभकामना सहित


पढ़ना, लिखना, गुनना, भाता भीतर की दुनिया की राही, सत्य नजर से देखे दुनिया, सुख की नव परिभाषा पाई !

अब जब नीड़ हुआ है खाली,
बच्चे कभी-कभी आते हैं, घर में एक मन्दिर बनाया, पर्व पड़ोस संग मनते हैं !

मोह नहीं गहनों, वस्त्रों का मुक्त हृदय की बनी स्वामिनी, मुखड़ा आत्म ज्योति से दमके, अधरों पर आनन्द रागिनी !

सीधी, सरल, प्रेममय अंतर मिलने वालों का दिल छूती, तप कर सोना और निखरता, दर्प, गर्व से सदा अछूती !



Thursday, March 18, 2021

सीधी, सरल, प्रेममयी वह

जन्मदिन पर शुभकामना सहित 


पढना, लिखना, गुनना, भाता

भीतर की दुनिया की राही,

सत्य नजर से देखे दुनिया,

सुख की नई परिभाषा पाई !

 

अब जब नीड़ हुआ है खाली,

बच्चे कभी-कभी आते हैं,

घर में एक मन्दिर बनाया,

पर्व पड़ोसियों संग मनते हैं !

 

मोह नहीं गहनों, वस्त्रों का

मुक्त हृदय की है स्वामिनी,

मुखड़ा आत्म ज्योति से दमके,

 अधरों पर आनन्द रागिनी !

 

सीधी, सरल, प्रेममयी वह

मिलने वालों का दिल छूती,

तप कर सोना और निखरता,

दर्प, गर्व से सदा अछूती ! 

Sunday, June 2, 2019

दीदी के लिए जन्मदिन पर



दीदी के लिए जन्मदिन पर 

घुंघराले रेशमी कुंतल, कुछ उलझे कुछ हैं सँवरे से
मुखड़े पर विश्वास अभय का, चमके जो सुख के मेकप से

वैरागी मन रह अलिप्त ही    
जग के सारे रोल निभाता,
न लेना उधो देना माधो
समय बिना योजना बिताता !

फक्कड़ तबियत सहज स्वभाव, खुशियों का इक मिला खजाना
बिना शर्त अब इस थाती को, अपने चारों ओर लुटाना

प्रकृति का सुसान्निध्य मिला है
नियमित सांध्य भ्रमण हैं करती,
यादों को मन के अलबम संग
नोट डायरी में भी करतीं !

ज्ञान वचन सुन, मथकर उनको, निज अनुभव में उन्हें परखतीं 
दीपक भाई, नीरू माँ संग, मुलाकात रोजाना करतीं

ओशो के आश्रम जा जाकर
यादों का गुलदान बनाया,
उनकी ख़ुशबू से जब तब फिर
फेसबुक का वाल महकाया !

बच्चे जब भी मिलने आते, पोती, नाती पर बलि जाती
जीजा जी की हर फरमाइश, तत्क्षण खुश हो पूरा करतीं

सत्य अनकहा एक असीम
भीतर सबके छिपा हुआ है
निज शब्दों में उसे उतारें
सद्गुरू का भी साथ मिला है

Friday, December 11, 2015

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ


जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

कल तक जो नन्हा-मुन्ना था
आज अचानक युवा हो गया,
मूँछे भी उग आयीं अब तो
दिल भी कुछ-कुछ जवां हो गया !

कोचिंग और पढ़ाई का क्रम
अब भी चलता पहले जैसे,
यह चिंता भी और समायी
कैरियर का चुनाव हो कैसे !

माँ-पापा की उम्मीदों पर
भाई के निस्वार्थ स्नेह पर,
खरा उतरना होगा अब तो
गुरूजनों की आशाओं पर !

मेहनत करने के दिन आये
मित्रों की मंडली बुलाये,
कभी इधर व कभी उधर झुक
मुश्किल से सामंजस्य बिठाये !

आया आज ख़ुशी का अवसर
सब मिलकर बधाई देते,
हम भी उसमें शामिल होकर
ढेर दुआएं तुमको देते !

सदा सत्य का पथ अपनाना
लक्ष्य सामने अपने रखना,
लोभ और बाधाएं आयें
नहीं कभी निज पथ से हटना !  


छोटे भांजे का आज जन्मदिन है