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Sunday, July 27, 2025

अंतिम श्वासें जब आती हों

पापाजी की प्रथम बरसी पर 

विनम्र श्रद्धांजलि स्वरूप 


एक बरस संपूर्ण हुआ है 

सहज ही याद आ रहे आप, 

घर के हर कोने में जैसे 

छायी उन्हीं कदमों की छाप! 


बड़े मज़े से पेपर पढ़ते 

अधलेटे बेड पर लेटे हों, 

हौले-हौले उतरें सीढ़ी 

सोफ़े पर जाकर बैठे हों !


झाड़न लिए हाथ में अपने 

दर-दीवारें साफ़ कर रहे, 

आँगन में फैलाते कपड़े 

मन ही मन कुछ जाप कर रहे !


कभी दूध देते बिल्ली को 

कभी नीर पौधों को देते, 

कितनी छवियाँ मन में आतीं 

दिखते जिनमें बातें करते !


जीवन की हर एक घड़ी का 

आदर किया आपने दिल से, 

अन्तर में सुख बसा हुआ था 

दिन कटते थे ईश स्मरण में !


ऐसे ही हो जीवन अपना 

मरण जहाँ उत्सव बन जाये, 

अंतिम श्वासें जब आती हों 

हाथ दुआ में तब उठ जायें !


Friday, November 11, 2022

इक दूजे का साथ निभाकर

 प्रिय भांजी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 

 

दिल में  सुख  की गागर  फूटी, तन-मन को जो भिगो रही है 

ऐसे ही मुसकाती रहना, ज्योति प्रेम की बिखर रही है !

 

पावन  बंधन में बँधना है, अंतर में फुलझड़ियाँ फूटें

नयनों में नव  स्वपन सजे हैं, हर बाधा हर संकट छूटे !

 

जीवन पथ पर साथ निभाने, नया तराना मिल गाएँगे  

दिल से दिल तो मिले हुए हैं, दो कुटुम्ब  भी मिल जाएँगे !

 

कुछ अधिकार सहज मिलेंगे,  कुछ कर्त्तव्य निभाने होंगे 

 अग्निदेव  के फेरे लोगी, मिलकर कदम बढ़ाने होंगे !

 

सुंदर इक परिवार  तुम्हारा, अस्तित्त्व में आ जाएगा  

दोनों परिवारों का सदा ही, रिश्ता सम्मान बढ़ाएगा ! 

 

इस जीवन का पावन लक्ष्य, है मैत्री व साझेदारी 

सेवा व सहयोग, प्रेम से, अर्धांगिनी होती है नारी !

 

शिव के बिना शक्ति कहाँ है, शक्ति बिना शिव भी अधूरे 

इक दूजे का साथ निभाकर, दोनों के हों सपने पूरे !

 

मीठे बोल  सरल स्वभाव से, सबके मन में जगह बनाना 

भीतर छिपी  अनंत ऊर्जा, बिना थके बस बढ़ती जाना !


Thursday, March 18, 2021

सीधी, सरल, प्रेममयी वह

जन्मदिन पर शुभकामना सहित 


पढना, लिखना, गुनना, भाता

भीतर की दुनिया की राही,

सत्य नजर से देखे दुनिया,

सुख की नई परिभाषा पाई !

 

अब जब नीड़ हुआ है खाली,

बच्चे कभी-कभी आते हैं,

घर में एक मन्दिर बनाया,

पर्व पड़ोसियों संग मनते हैं !

 

मोह नहीं गहनों, वस्त्रों का

मुक्त हृदय की है स्वामिनी,

मुखड़ा आत्म ज्योति से दमके,

 अधरों पर आनन्द रागिनी !

 

सीधी, सरल, प्रेममयी वह

मिलने वालों का दिल छूती,

तप कर सोना और निखरता,

दर्प, गर्व से सदा अछूती ! 

Friday, May 22, 2015

विवाह की वर्षगाँठ पर

öविवाह की वर्षगाँठ पर 

तुम्हें याद है
अग्नि की पावन वह ज्वाला
झुके नयन कंपित हाथों से
पहनायी सुंदर जयमाला
दो जीवन तब एक हुए थे
नव यात्रा पर कदम बढ़े थे !

तुम्हें याद है
õनन्हे पावों की वह आहट
अंतर्मन को छू ले ऐसा
मधुर हास्य मीठी तुतलाहट
पलक झपकते बरस बीत गए
बचपन के दिन युवा हो गए !

तुम्हें याद है
दुःख की घड़ियाँ मिलकर काटीं
सुख के स्वप्न संजोये कितने
कितने उत्सव साथ मनाये
संग-संग देखे सूर्योदय व
चान्दनी रातों में मुस्काए !

तुम्हें याद है
साथी अभी और चलना है
जीवन के इस नये मोड़ पर
उम्र के सूरज को बढना है
सम्बल देते एक दूजे को
जीवन ज्योति बन जलना है !


Friday, March 13, 2015

जन्मदिन पर

जन्मदिन पर 

अल्हड़ छोरी, दीपा रानी
प्यारा मुखड़ा, मीठी वाणी,
खूब किताबें पढ़ती है पर
मोबाइल की है दीवानी !

नये-नये फैशन वह जाने
तरह-तरह की मुद्राएँ भी,
सखियों संग पटती है खूब
कभी मुक्त हो गाये भी !

पैरों में छिपा है नाच
दिल भी ताता थैया करता,
कभी किसी को नहीं सताता  
सुख बांटे यह इच्छा करता !

दीदी-जीजू जान छिड़कते
माँ-पापा की आँख का तारा,
जन्मदिवस पर लो बधाई
बीते सुख से जीवन सारा !