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Sunday, July 27, 2025

अंतिम श्वासें जब आती हों

पापाजी की प्रथम बरसी पर 

विनम्र श्रद्धांजलि स्वरूप 


एक बरस संपूर्ण हुआ है 

सहज ही याद आ रहे आप, 

घर के हर कोने में जैसे 

छायी उन्हीं कदमों की छाप! 


बड़े मज़े से पेपर पढ़ते 

अधलेटे बेड पर लेटे हों, 

हौले-हौले उतरें सीढ़ी 

सोफ़े पर जाकर बैठे हों !


झाड़न लिए हाथ में अपने 

दर-दीवारें साफ़ कर रहे, 

आँगन में फैलाते कपड़े 

मन ही मन कुछ जाप कर रहे !


कभी दूध देते बिल्ली को 

कभी नीर पौधों को देते, 

कितनी छवियाँ मन में आतीं 

दिखते जिनमें बातें करते !


जीवन की हर एक घड़ी का 

आदर किया आपने दिल से, 

अन्तर में सुख बसा हुआ था 

दिन कटते थे ईश स्मरण में !


ऐसे ही हो जीवन अपना 

मरण जहाँ उत्सव बन जाये, 

अंतिम श्वासें जब आती हों 

हाथ दुआ में तब उठ जायें !


Friday, August 9, 2024

उनके स्नेह की दृढ़ डोर से


प्रिय ब्लॉगर मित्रों, पिछले माह के अंतिम सप्ताह में पिताजी ने देह त्याग दी। आज तीन सप्ताह के बाद ब्लॉग खोला है, पर लगता है जैसे एक युग बीत गया।



उनके स्नेह की दृढ़ डोर से




शब्दों में सामर्थ्य नहीं है 

जो परिभाषित कर सकें उन्हें, 

सम्मान और स्नेह लुटाकर 

उर स्मरण आज कर रहा जिन्हें !


अनुशासन, दृढ़ इच्छा शक्ति

दो स्तंभों पर खड़ा था जीवन, 

यम-नियम साधा हर क्षेत्र में

व्यर्थ नहीं व्यय किया कभी क्षण !


एक विशाल वटवृक्ष सा ही 

व्यक्तित्तव था पापा जी का,

जिसकी छाया में पलता था

छह भाई-बहनों का कुनबा !


माँ की कमी नहीं खलने दी 

ममता सब पर सदा लुटायी,

कठिन श्रम मेहनत के बल पर 

क़िस्मत सुंदर स्वयं बनायी !


उनके स्नेह की दृढ़ डोर से

बँधे हुए थे सभी सुरक्षित, 

अब लगता यह कहाँ गया है 

शांत सहज आनन वह पुलकित !


वर्षों से वे बने हुए थे 

रचनाओं के पहले पाठक, 

सहज प्रेरणा स्रोत बने हैं

माँ जैसे प्यारे  अभिभावक !


बड़े धैर्य से लड़ा उन्होंने 

अंतिम युद्ध रोग से अपने, 

डाले नहीं कभी हाथियार

जीवन जीया बल पर अपने !


देह का दर्द रोक न पाया

संगीत से लगाव  पुराना, 

विविध-भारती पर वर्षों से

बड़े भाव से सुनते गाना !


रस-सौंदर्य की परख अति  थी 

चेहरे पर सौम्यता छायी,

जो भी आया भेंट उसे दी 

भक्ति ह्रदय में सदा समायी !


जहाँ कहीं हैं आप सुनेंगे 

श्रद्धा सुमन समर्पित करते, 

हैं अनंत पर थोड़े से ही  

मन के भाव शब्द में भरते !


Thursday, April 30, 2015

आदरणीय व प्रिय सिन्हा आंटी को श्रद्धासुमन

आदरणीय व प्रिय सिन्हा आंटी को श्रद्धासुमन


दुबली हो गयी काया
मुखड़े पर शांति का भाव एक समान
किसी को कष्ट दिए बिना
किया अपने इस जीवन से प्रयाण
याद आती हैं आपकी मुस्कुराहटें
दबी-दबी हँसी और तृप्ति का अहसास
हाँ, जीवन से भरपूर पाया आपने
सुविचारित, सुसंस्कृत जीवन की अधिकारिणी
बनी रहीं समर्पित पाठिका अंतिम क्षण तक
नहीं त्यागा देह को संवारना, सजाना
दिया जीवन को पूर्ण सम्मान
सदा चलकर समय पर.. उसको मान 
जन्म देता है संगीत को
एक लय बद्ध जीवन ही
दिलों में अपनों के
सुमधुर स्मृतियों को भी
आपका स्नेह बेशर्त था
हर निमन्त्रण आपका आग्रह भरा
साझा किया था अपनी यादों को
भागलपुर और पटना की बातों को
शांतिमय हो आगे का पथ आपका
यही है हमारे दिल की दुआ !