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Sunday, January 26, 2025

साहस भरा हर श्वास में

माँ की पुण्य स्मृति को श्रद्धा सुमन 


उन्होंने हमें दिया जनम 

पोषण किया कर हर जतन, 

उस स्नेह ममता मूर्ति  को

कर याद हम करते नमन !


पढ़ती रहीं पढ़ाती भी 

बुनती सदा  सिखाती भी, 

साहस भरा हर श्वास में 

वह इक आत्मा स्वतंत्र थीं !


घूमीं बहुत पर्वत चढ़ीं 

दीपक जो छह जला गयीं, 

पिता संग माँ हर हाल में 

तृप्ति  का रस पिला गयीं  !


हम याद करते हैं उन्हें 

शुभ प्रेम अंतर में भरे, 

उन्हीं  रास्तों पर चल सकें 

जीवन से निज दिखा गयीं !



Friday, August 9, 2024

उनके स्नेह की दृढ़ डोर से


प्रिय ब्लॉगर मित्रों, पिछले माह के अंतिम सप्ताह में पिताजी ने देह त्याग दी। आज तीन सप्ताह के बाद ब्लॉग खोला है, पर लगता है जैसे एक युग बीत गया।



उनके स्नेह की दृढ़ डोर से




शब्दों में सामर्थ्य नहीं है 

जो परिभाषित कर सकें उन्हें, 

सम्मान और स्नेह लुटाकर 

उर स्मरण आज कर रहा जिन्हें !


अनुशासन, दृढ़ इच्छा शक्ति

दो स्तंभों पर खड़ा था जीवन, 

यम-नियम साधा हर क्षेत्र में

व्यर्थ नहीं व्यय किया कभी क्षण !


एक विशाल वटवृक्ष सा ही 

व्यक्तित्तव था पापा जी का,

जिसकी छाया में पलता था

छह भाई-बहनों का कुनबा !


माँ की कमी नहीं खलने दी 

ममता सब पर सदा लुटायी,

कठिन श्रम मेहनत के बल पर 

क़िस्मत सुंदर स्वयं बनायी !


उनके स्नेह की दृढ़ डोर से

बँधे हुए थे सभी सुरक्षित, 

अब लगता यह कहाँ गया है 

शांत सहज आनन वह पुलकित !


वर्षों से वे बने हुए थे 

रचनाओं के पहले पाठक, 

सहज प्रेरणा स्रोत बने हैं

माँ जैसे प्यारे  अभिभावक !


बड़े धैर्य से लड़ा उन्होंने 

अंतिम युद्ध रोग से अपने, 

डाले नहीं कभी हाथियार

जीवन जीया बल पर अपने !


देह का दर्द रोक न पाया

संगीत से लगाव  पुराना, 

विविध-भारती पर वर्षों से

बड़े भाव से सुनते गाना !


रस-सौंदर्य की परख अति  थी 

चेहरे पर सौम्यता छायी,

जो भी आया भेंट उसे दी 

भक्ति ह्रदय में सदा समायी !


जहाँ कहीं हैं आप सुनेंगे 

श्रद्धा सुमन समर्पित करते, 

हैं अनंत पर थोड़े से ही  

मन के भाव शब्द में भरते !


Tuesday, November 30, 2021

रब पर भरोसा कर लिया

पापा जी के लिए 


रब पर भरोसा कर लिया

घर से  हुए बेघर तब किशोर ही तो थे 

छोटी सी उम्र में भी हौसले बड़े थे 


काम दिन में कई, की रातों को पढ़ाई 

निभाया साथ माँ-बाप का पुत्र बड़े थे 


सहा दुःख लाड़ली बिटिया के बिछड़ने का 

आँसू उन आँखों के थमते ही नहीं थे 


अनुजों को दिया था हर तरह का सहारा 

भरोसे ऐसे पाले कि टूटे नहीं थे 


पिता का साया उठा माँ की दुआएँ थीं 

वह जब गयीं परिवार के मुखिया बने थे 


बीच राह में संगिनी भी साथ छोड़ गयी 

बच्चों के चेहरे देख ज़ख़्म सी लिए थे 


दो भाई, एक बहन ने अंतिम विदा ली  

रब पर भरोसा कर लिया बिखरे नहीं थे 


Monday, December 2, 2019

जन्मदिन पर लो दुआएं

जन्मदिन पर 
ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ 

जिंदगी की इस डगर पर
यूँही तुम हँसती हुई सी
फूल सी खिलती हुई सी
रौशनी की इक लहर बन
बढ़ती चलो छू लो गगन !

माँ सदा आशीष बनकर
चल रही हैं साथ हर पल
हर ख़ुशी पर वारि जाते
उस पिता की ढाल बनकर
उड़ो ले  उम्मीद के पर !

जॉब पूर्ण दिल से करती
कम्पनी की साख बढ़ती
घर बड़ा सुंदर सजाया
स्वयं भी सजती-सँवरती
चलो मंजिल है  बुलाती !

जन्मदिन पर लो दुआएं
सभी मिलकर गीत गाएं
स्वप्न सभी पूर्ण होंगे
पिता जल्दी यहाँ आएं
करो स्वागत पुष्प लेकर !


Friday, February 1, 2019

है कृतज्ञ हो जाने का दिन



जन्मदिन पर



माँ की उंगली पकड़ के तुमने
जिस दिन चलना सीखा था,
पिता के कांधे पर पर चढ़ कर
इस दुनिया को देखा था !

आज स्मरण करने का दिन वे 
आगे पीछे घूमा करते,
बात तुम्हारे मुख से निकली
बड़े प्यार से पूरा करते !

आज खड़ी निज पैरों पर तुम,
उनको तुम पर गर्व हो रहा,
एक समर्थ सजग बिटिया को
देख-देख कर हर्ष हो रहा !

है कृतज्ञ हो जाने का दिन
हाथ जोड़ मन्दिर में जाना,
समृद्धि वैभव जो भी पाया
धन्यवाद दे उसे जताना !

जन्मदिवस पर यह भी सोचें
नूतन वर्ष मिला जो आगे,
बने योजना कुछ ऐसा हो
जिससे अंतर्मन यह जागे !

Thursday, June 18, 2015

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि

एक आश्रय स्थल होता है पिता
बरगद का वृक्ष ज्यों विशाल
नहीं रह सके माँ के बिना
या नहीं रह सकीं वे बिना आपके
सो चले गये उसी राह
छोड़ सभी को उनके हाल....

पूर्ण हुई एक जीवन यात्रा
अथवा शुरू हुआ नवजीवन
भर गया है स्मृतियों से
मन का आंगन
सभी लगाये हैं होड़ आगे आने की
लालायित, उपस्थिति अपनी जताने की
उजाला बन कर जो पथ पर
चलेंगी साथ हमारे
बगीचे से फूल चुनते
सर्दियों की धूप में घंटों
अख़बार पढ़ते
नैनी के बच्चे को खिलाते
मंगलवार को पूजा की तैयारी करते
जाने कितने पल आपने संवारे....

विदा किया है भरे मन से
काया अशक्त हो चुकी थी
पीड़ा बनी थी साथी
सो जाना ही था पंछी को
 छोड़कर यह टूटा फूटा बसेरा
नये नीड़ की तलाश में

जहाँ मिलेगा एक नया सवेरा... 

(दो वर्ष पहले १८ जून को ससुर जी ने देह त्याग दिया, उसी समय यह लिखा था )

Thursday, October 28, 2010

माँ व पिता जी

जन्मदिन के अवसर पर  शुभकामनाओं सहित

एकदूजे के लिये बने हैं
एकदूजे का साथ निभाते
रात और दिन साथ साथ रह
जग में एक मिसाल बनाते I

सुबह सवेरे लान में टहलें
 ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाते
समय से करते हर एक काम
सलीके से सब कुछ निपटाते I

शांत सरल स्वभाव है उनका
बच्चों की ही चिंता करते
अपनी क्षमता से बढकर
घर के काम में हाथ बंटाते I

साठ बरस का साथ अनोखा
 एकदूजे की आदत जानें
सुख में दुःख में साथ निभाया
 दिल से दिल को पहचानें I

कभी-कभी झुंझलाते पापा
झूठ-मूठ जब माँ डर जातीं
जाने क्यों शंका है मन में
हर पल नजर टिकाये रहतीं I

प्रेम जीतता आया जग में
सेवा से हर रोग हारता
सौ बरस हो उम्र आपकी
हम सबका दिल यही मांगता I