Showing posts with label संगीत. Show all posts
Showing posts with label संगीत. Show all posts

Friday, August 9, 2024

उनके स्नेह की दृढ़ डोर से


प्रिय ब्लॉगर मित्रों, पिछले माह के अंतिम सप्ताह में पिताजी ने देह त्याग दी। आज तीन सप्ताह के बाद ब्लॉग खोला है, पर लगता है जैसे एक युग बीत गया।



उनके स्नेह की दृढ़ डोर से




शब्दों में सामर्थ्य नहीं है 

जो परिभाषित कर सकें उन्हें, 

सम्मान और स्नेह लुटाकर 

उर स्मरण आज कर रहा जिन्हें !


अनुशासन, दृढ़ इच्छा शक्ति

दो स्तंभों पर खड़ा था जीवन, 

यम-नियम साधा हर क्षेत्र में

व्यर्थ नहीं व्यय किया कभी क्षण !


एक विशाल वटवृक्ष सा ही 

व्यक्तित्तव था पापा जी का,

जिसकी छाया में पलता था

छह भाई-बहनों का कुनबा !


माँ की कमी नहीं खलने दी 

ममता सब पर सदा लुटायी,

कठिन श्रम मेहनत के बल पर 

क़िस्मत सुंदर स्वयं बनायी !


उनके स्नेह की दृढ़ डोर से

बँधे हुए थे सभी सुरक्षित, 

अब लगता यह कहाँ गया है 

शांत सहज आनन वह पुलकित !


वर्षों से वे बने हुए थे 

रचनाओं के पहले पाठक, 

सहज प्रेरणा स्रोत बने हैं

माँ जैसे प्यारे  अभिभावक !


बड़े धैर्य से लड़ा उन्होंने 

अंतिम युद्ध रोग से अपने, 

डाले नहीं कभी हाथियार

जीवन जीया बल पर अपने !


देह का दर्द रोक न पाया

संगीत से लगाव  पुराना, 

विविध-भारती पर वर्षों से

बड़े भाव से सुनते गाना !


रस-सौंदर्य की परख अति  थी 

चेहरे पर सौम्यता छायी,

जो भी आया भेंट उसे दी 

भक्ति ह्रदय में सदा समायी !


जहाँ कहीं हैं आप सुनेंगे 

श्रद्धा सुमन समर्पित करते, 

हैं अनंत पर थोड़े से ही  

मन के भाव शब्द में भरते !


Sunday, April 4, 2021

दिल में बसी ईश की चाहत

 

पिताजी के लिए जन्मदिन पर
उम्र हुई, तन करे शिकायत
कभी-कभी मन भी हो आहत,
लेकिन आत्मज्योति प्रज्वलित है
दिल में बसी ईश की चाहत !
 
अब भी दिनचर्या नियमित है
ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाते,
पीड़ा हँस कर सहना आता
औरों को भी राह दिखाते !
 
प्रभु भजन से सुबह सँवरती
दिन भर ही अध्ययन चलता है,
सुर संगीत का साथ पुराना
जिससे संध्या काल ढलता है !
 
संतानों को स्नेह बांटते 
नाती-पोती संग मुस्काते,
निज नाम सार्थक करके
सदा सहाय बन कर रहते !
 
नानक ने जो राह दिखाई
सदा उसी पर चले हैं आप,
जन्मदिन पर लें बधाई
हमें आप पर है अति नाज !

Thursday, January 14, 2021

बगिया श्रम से नित्य निखरती

बहनोई जी के लिए 
जन्मदिनपर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 

हुए प्रौढ़ पर दिल में अब भी
नन्हा सा एक बालक रहता,
मुखड़े पर बन हास्य कभी जो
चुहल भरी बातों में दिखता !

भोर बीतती फूलों के संग
बगिया श्रम से नित्य निखरती,
रसलखेमा की सुबह-शामें
कैद कैमरे में भी होतीं !

सुंदर घर औ' स्वच्छ रास्ते
रोज दुबई की सैर कराते,
उत्तम शेफ होने के राज
अब दूसरों को बतलाते !

सुर-संगीत बसा है दिल में
मधुर गीत अधरों पर रहते,
नए-नए पकवान बनाकर
घर-बाहर सबको खुश रखते !

हरफन मौला पापा पाकर
दोनों बिटियाँ करती नाज,
जीवन संगिनी सदा साथ है
है गुरु ज्ञान पर दृढ़ विश्वास !

जन्मदिवस पर हम सब देते
यह दुआ सब स्वप्न हों पूरे,
इसी तरह हँसते-मुस्काते
जीवन का हर इक क्षण बीते
 

Thursday, April 30, 2015

आदरणीय व प्रिय सिन्हा आंटी को श्रद्धासुमन

आदरणीय व प्रिय सिन्हा आंटी को श्रद्धासुमन


दुबली हो गयी काया
मुखड़े पर शांति का भाव एक समान
किसी को कष्ट दिए बिना
किया अपने इस जीवन से प्रयाण
याद आती हैं आपकी मुस्कुराहटें
दबी-दबी हँसी और तृप्ति का अहसास
हाँ, जीवन से भरपूर पाया आपने
सुविचारित, सुसंस्कृत जीवन की अधिकारिणी
बनी रहीं समर्पित पाठिका अंतिम क्षण तक
नहीं त्यागा देह को संवारना, सजाना
दिया जीवन को पूर्ण सम्मान
सदा चलकर समय पर.. उसको मान 
जन्म देता है संगीत को
एक लय बद्ध जीवन ही
दिलों में अपनों के
सुमधुर स्मृतियों को भी
आपका स्नेह बेशर्त था
हर निमन्त्रण आपका आग्रह भरा
साझा किया था अपनी यादों को
भागलपुर और पटना की बातों को
शांतिमय हो आगे का पथ आपका
यही है हमारे दिल की दुआ !

Thursday, October 28, 2010

शादी मुबारक

 शुभ विवाह के लिये ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

शरद ऋतु की सुंदर बेला, देवी माँ का है शुभ वन्दन
सदा रहे अटूट यह रिश्ता, बहुत मुबारक नव गठबन्धन

मेल कानपुर व मेरठ का, सदियों से है चलता आया
आज उसी कड़ी में सुंदर, कथ्य नया इक जुड़ने आया

दो परिवारों के सपनों को, आज सभी सच होता देखें
स्वर्गवासिनी माँ के सँग सँग, देव देवियाँ हर्षित देखें

शिल्पी, श्रुति, अनुज पुलकित हैं, पिता दे रहे शुभ आशीषें
दादाजी फूले न समाते, नानी के ना पांव जमीं पे

ढोल बजे संगीत गूंजता, मामा का परिवार थिरकता
मेंहदी और सगन की रस्में, मिलजुल करते समय भागता   

लड़की वाले हुए व्यस्त हैं, नयी जगह फिर काम बहुत है
कब आये बारात यही धुन, जिसको देखो वही मगन है

मिलें सभी की दिली दुआएं, नव जोड़े को बहुत बधाई
दूर सही पर दिल से भेजी, चिठ्ठी कविता बन के आयी