Tuesday, November 30, 2021

रब पर भरोसा कर लिया

पापा जी के लिए 


रब पर भरोसा कर लिया

घर से  हुए बेघर तब किशोर ही तो थे 

छोटी सी उम्र में भी हौसले बड़े थे 


काम दिन में कई, की रातों को पढ़ाई 

निभाया साथ माँ-बाप का पुत्र बड़े थे 


सहा दुःख लाड़ली बिटिया के बिछड़ने का 

आँसू उन आँखों के थमते ही नहीं थे 


अनुजों को दिया था हर तरह का सहारा 

भरोसे ऐसे पाले कि टूटे नहीं थे 


पिता का साया उठा माँ की दुआएँ थीं 

वह जब गयीं परिवार के मुखिया बने थे 


बीच राह में संगिनी भी साथ छोड़ गयी 

बच्चों के चेहरे देख ज़ख़्म सी लिए थे 


दो भाई, एक बहन ने अंतिम विदा ली  

रब पर भरोसा कर लिया बिखरे नहीं थे 


5 comments:

  1. आज जब हर ओर केवल माँ ममता मातृत्व कि चर्चा होती है आपने पिता और पितत्व को सराहा है ।
    सच माँ कि ममता अनमोल है तो पिता के प्रेम और बलिदान को अनदेखा नहीं कर सकते - जो कि हम हमेशा करते है ।

    उन्दा सृजन !

    आदरणीय , एक सर जी ने कहा मेरी रचना में त्रुटि है पर पुछने पर भी नहीं त्रुटि क्या है?
    कृत्या मेरे Blog पर पधारें और ईमानदारी से त्रुटि बताईये ताकि मैं उसे सुधार संकु । धन्यवाद !

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(०२ -१२ -२०२१) को
    'हमारी हिन्दी'(चर्चा अंक-४२६६)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  3. सुंदर अभिव्यक्ति।

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  4. बहुत ही सुन्दर हृदय स्पर्शी रचना

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  5. बहुत ही सारगर्भित और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ।

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