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Wednesday, August 10, 2016

जन्मदिवस पर शुभकामनायें

जन्मदिवस
पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ



खिला-खिला है चेहरा उनका
जैसे धूप सर्दियों वाली,
सदा प्रफुल्लित सदा विहँसती
गुलमोहर की जैसे डाली I

जीजाजी की छाया दीदी
जोड़ी उनकी बड़ी निराली
इतना विस्तृत घर-संसार
सचमुच बड़ी नसीबों वाली I

रामनाम की पी थी घुट्टी
अब तो घोट लिया ओशो भी
भीतर गहरा ज्ञान छिपाए
दिखती ऊपर भोली-भाली I

भाई-भाभी व बहनों का
सदा हाल लेतीं रहती वह
शादी वर्षगाँठ न भूलें
न तारीख जन्मदिन वाली

बच्चों से भी नहीं शिकायत
दूर विदेश बसे क्यों जाकर
सीखी कम्पयूटर की भाषा
फेसबुक की रीत निराली I

आसपड़ोस सभी से मिलती
सत्संग की महफिल सजाकर
पर्वो त्योहारों पर मिलजुल
समधियों संग होली दीवाली I

पाककला में बड़ी निपुण वह
है मेहमाननवाजी अद्भुत
अरवी, भिन्डी या पुलाव हो
या फिर कढ़ी पकोड़ों वाली I

आप बसीं हम सबके दिल में
दिल की धड़कन कहे यही
माँ सा प्यार सदा बाँटती
दीदी देहरादून वाली I

Friday, October 29, 2010

लावण्या

लावण्या

रंगत गोरी शहद सी बोली
लावण्या दिखती है भोली
तेज दिमाग दिल कलात्मक
उर्वर मेधा है रचनात्मक I

माँ जैसी वह है इमोशनल
तैरे जैसे कोई प्रोफेशनल
फटफट कर सब्जियां काटे
फेसबुक पर सूचनायें बाटें I

पोज बनती झट से सुंदर
गीत फूटते ज्यों हो निर्झर
कभी-कभी झगड़े दीदी से
जुड़ा है गहरा जिससे दिल पर I

एक सी हैं बचपन की यादें
साथ साथ जीने के वादे
पापा से बतियाती है जब
दुनिया को भुलाती है तब I

लावण्या, तुम हो अति प्यारी
नजर लगे न कभी हमारी
इसी तरह लिखती भी रहना
चमके एक दिन कलम तुम्हारी !





Thursday, October 28, 2010

दीदी

आदरणीय व प्रिय दीदी के जन्मदिवस
पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

खिला-खिला है चेहरा उनका
जैसे धूप सर्दियों वाली
सदा प्रफुल्लित सदा विहँसती
गुलमोहर की जैसे डाली I

जीजाजी की छाया दीदी
जोड़ी उनकी बड़ी निराली
इतना विस्तृत घर-संसार
सचमुच बड़ी नसीबों वाली I

रामनाम की पी थी घुट्टी
अब तो घोट लिया ओशो भी
भीतर गहरा ज्ञान छिपाए
दिखती ऊपर भोली-भाली I

भाई-भाभी व बहनों का
सदा हाल लेतीं रहती वह
शादी वर्षगाँठ न भूलें
न तारीख जन्मदिन वाली

बच्चों से भी नहीं शिकायत
दूर विदेश बसे क्यों जाकर
सीखी कम्पयूटर की भाषा
फेसबुक की रीत निराली I

आसपड़ोस सभी से मिलती
सत्संग की महफिल सजाकर
पर्वो त्योहारों पर मिलजुल
समधियों संग होली दीवाली I

पाककला में बड़ी निपुण वह
है मेहमाननवाजी अद्भुत
अरवी, भिन्डी या पुलाव हो
या फिर कढ़ी पकोड़ों वाली I

आप बसीं हम सबके दिल में
दिल की धड़कन कहे यही
माँ सा प्यार सदा बाँटती
दीदी देहरादून वाली I