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Wednesday, October 19, 2016

भाभीजी की पुण्य स्मृति में



प्रिय सुमन भाभीजी के लिये

(जो आज हमारे मध्य नहीं हैं, किन्तु जो सदा-सदा  हमारे दिलों में रहेंगी.) 

एक रेलवे कॉलोनी है, मुग़लसराय की गलियों में,
वहीं पली, बढ़ीं, पढीं थीं, ब्याही गयीं बनारस में

भरे घर में आयीं भाभी, सँग भईया के फेरे डाल
देवर-ननद, सास-ससुर सब, हुए बहू पाकर निहाल

सीतापुर, सहारनपुर में, कुछेक बरस बिताए फिर
राजधानी में बना आशियाँ, जनकपुरी जा पहुंची फिर

हरि नगर में चंद दिनों तक, रौनक भी फैलाई थी
स्थायी आवास को लेकिन, कृष्ण पुरी ही भायी थी

हंसमुख और मिलनसार भी, सजना-धजना बहुत है भाता
बातों में होशियार बड़ी हैं, पाकशास्त्र की भी हैं ज्ञाता

दोहरा बदन मगर फुर्तीली, भाभी जिनका नाम सुमन है
प्यारी माँ हैं, प्रिया सजीली, बहुत पुराना यह बंधन है

गीत सुनातीं झूम-झूम के, बड़े भाव से पूजा करतीं
कॉलोनी में सबसे मिलकर, सारे पर्व मनाया करतीं

जन्म दिन फिर-फिर आता है, कुछ भूली सी याद दिलाने
सुख-दुःख तो आते जाते हैं, आये हैं हम बस मुस्काने



Monday, October 19, 2015

श्रद्धांजलि


आज वह हमारे मध्य नहीं हैं पर उनकी यादें दिल के कोने कोने में सजी हैं.

प्रिय भाभीजी के लिये

एक रेलवे कॉलोनी है, मुग़लसराय की गलियों में,
वहीं पली, बढ़ीं, पढीं थीं, ब्याही गयीं बनारस में

भरे घर में आयीं भाभी, सँग भईया के फेरे डाल
देवर-ननद, सास-ससुर सब, हुए बहू पाकर निहाल

सीतापुर, सहारनपुर में, कुछेक बरस बिताए फिर
राजधानी में बना आशियाँ, जनकपुरी जा पहुंची फिर

हरि नगर में चंद दिनों तक, रौनक भी फैलाई थी
स्थायी आवास को लेकिन, कृष्ण पुरी ही भायी थी

हंसमुख और मिलनसार भी, सजना-धजना बहुत है भाता
बातों में होशियार बड़ी हैं, पाकशास्त्र की भी हैं ज्ञाता

दोहरा बदन मगर फुर्तीली, भाभी जिनका नाम सुमन है
प्यारी माँ हैं, प्रिया सजीली, बहुत पुराना यह बंधन है

गीत सुनातीं झूम-झूम के, बड़े भाव से पूजा करतीं
कॉलोनी में सबसे मिलकर, सारे पर्व मनाया करतीं

जन्म दिन फिर-फिर आता है, कुछ भूली सी याद दिलाने
सुख-दुःख तो आते जाते हैं, आये हैं हम बस मुस्काने


Friday, October 29, 2010

शुभ विवाह

शुभ विवाह

निधि पाता है प्रबल ही, जग की ऐसी रीत
जो विनीत हो यश मिले, बलवानों को प्रीत I

लखनऊ में विद्या मिली, नोएडा में रोजगार
भाग्य बड़ा ही है प्रबल, गया पूना में दिल हार I

सूरत से आयी निधि, अति सुंदर है मेल
एमबीए दोनों मिले, सौभाग्य का खेल I

शिपयार्ड में पिता हैं, माँ डॉक्टर प्रोफेसर
नाजों से पली निधि, लगे न कोई नजर I

पारुल पाती भेज के, सबको रही बुलाय
भाभी पाने की खुशी, मन में नहीं समाय I

घर में शादी आ गयी, पड़ा मलेशिया टूर
दफ्तर में भी काम बढा, परीक्षाएं न दूर I

मामा-मामी मग्न हुए, अभिनव-रिया के संग
दुलियाजान से जा पहुँचे, मन में भरे उमंग I

आयी बेला मिलन की, चारों ओर उमंग
शुभ विवाह के ढोल बजे, शहनाई की तरंग I

आये देस-विदेस से, रिश्तेदार अनेक
शादी वाले गांव में, हुए सभी हैं एक I

अवसर बड़ा विशेष है, कितने हुए प्रबंध
परिवारों में जुड़ रहे, नए-नए सम्बन्ध I

मंजीरे भी बज उठे, मेंहदी करे किलोल
गीत सुहाग के गा रहीं, बुआ, चाची, डोल I

दिल्ली से बारात चली, नोएडा पहुंची जाय
मॉर्डन है स्कूल यहाँ, अरुण विहार बुलाय I

लें बधाई आप सब, झोली भर-भर आज
नवजीवन सुखमय रहे, पूर्ण हों सब काज I



 


कुछ दोहे प्रीत भरे

कुछ दोहे प्रीत भरे


भैया-भाभी आ रहे बिटिया के संग आज
मन में उठी उमंग का असल यही है राज I

छोटी भाभी साथ है दुगना है उल्लास
पलक पांवड़े बिछा रही मन में खिली पलास I

दिल्ली दुलियाजान का हुआ मिलन है आज
शुभ दिन है शुभ घड़ी भी हुआ चैत्र आगाज I

सुमन खिले चहुँ दिशा में ऋतु नरेश का काल
हर्षित भई आराधिका रेखा क्षितिज की लाल I

दिगबोई में चित्र लिए डिब्रुगढ़ से ट्रेन
गोहाटी में कर दर्शन पाया दिल का चैन I

मेघालय जा पहुंचे अब शोभित किया शिलौंग
सुख उजाला बरस रहा है दिनेश का संग I

घर अब देखो बुला रहा यात्रा करें समाप्त
यादें मधुर समेट दिलों में खुशियाँ कर लें प्राप्त I