Sunday, January 24, 2021

अब पुन: मिला घर का आंगन

प्रिय भांजे के लिए

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

 

बरसों घर से दूर रहे तुम

ममता के आँचल से वंचित,

अब पुन: मिला घर का आंगन

मित्रों से मिल अंतर हर्षित !

 

छोटे भाई का निश्छल स्नेह

अर्धरात्रि  को काटा  केक,

पापाजी ने ली है छुट्टी

परिवार हुआ है फिर से एक !

 

वस्त्रों को धोने की चिंता,

नून-तेल-लकड़ी का झंझट,

शॉपिंग, क्लीनिंग की छुट्टी

कुक, मेड का मिटा है टेंशन !

 

बचपन का घर फिर से पाया

बड़े चाव से उसे सजाया,

जिन स्वप्नों को मन में रखा

पूर्ण हों सकें वक्त है आया !

 

जीवन पथ पर बढ़ते जाओ

करुणा भाव मिला है रब से,

जन्मदिवस पर बहुत बधाई

देते हैं हम मिलकर  दिल से ! 


7 comments:

  1. जीवन पथ पर बढ़ते जाओ
    करुणा भाव मिला है रब से,
    जन्मदिवस पर बहुत बधाई
    देते हैं हम मिलकर दिल से !

    बहुत-बहुत बहुत खूबसूरत रचना।

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  2. सरल-सी, प्यारी-सी कविता है यह आपकी । आपके भांजे को ढेरों आशीष एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं ।

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  3. अच्छी रचना, बधाई आपको।

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  4. बहुत बहुत सुन्दर रचना

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  5. जीवन पथ पर बढ़ते जाओ

    करुणा भाव मिला है रब से,

    जन्मदिवस पर बहुत बधाई

    देते हैं हम मिलकर दिल से !

    मेरी भी शत शत हार्दिक शुभ कामनाएं

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