Sunday, July 26, 2026

जीवन इक अमोल अवसर है

पापा जी की दूसरी पुण्यतिथि पर 

विनम्र श्रद्धांजलि 


दो वर्ष बीते कहने को 

लगता है यह कल की बात, 

घेर आपको सब बैठे थे 

आने को थी अंतिम रात !


इधर-उधर की बातें करते 

कापी-कलम लिया हाथ में, 

अस्पष्ट सी लिखाई लेकिन 

थी स्पष्टता हर बात में !


चाय का घूँट वह अंतिम 

अंतिम था रात्रि का भोजन, 

अर्ध रात्रि को हाथ जोड़कर 

जैसे किया आख़िरी निवेदन !


कितने पाठ सिखा गया है 

शांतिपूर्ण था वह प्रस्थान, 

अंतिम घड़ी में था अधरों पर 

उसी परमशिव, ब्रह्म का नाम !


जीवन का हर पल पावन था 

मृत्यु भी ऐसी ही पायी, 

प्रिय पापाजी  सदा आपने  

सहज-सजग रह शांति पायी !


आज स्मरण आते हैं वे पल 

 मोबाइल पर की चर्चाएँ, 

जीवन इक अमोल अवसर है 

स्मरण आपका याद दिलाये !



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