Tuesday, February 3, 2026

सदा नमन करते हैं तुझको

सदा नमन करते हैं तुझको

 

माँ कुछ ऐसे दिल में रहती

होने का भ्रम भी न देती,

दुनिया से हो जाये रवाना

मन से कभी न रुखसत होती !

 

जिसके द्वारा जग में आये

जिसके होने से निज होना,

जिसकी अंगुली थाम के सीखा

नन्हें पैरों पैरों चलना !

 

जिसने भाषा संस्कार दिये

वह धैर्य, प्यार की मूरत है, 

वात्सल्य का एक खजाना

हर बच्चे की जरूरत है !

 

जिसको बहुत सताया हमने

जिसको बहुत रुलाया हमने,

उसने बस मुस्कान बिखेरी

उसको कहाँ हंसाया हमने !

 

बच्चों को आशीषें देती

उनकी झोली भर-भर देती,

खुद तो भूखी रह सकती थी

घर भर को तृप्त कर देती !

 

माँ की छाया कितनी कोमल

उसका साया सदा साथ है,

स्मृति ही सम्बल भर देती

सिर पर उसका सदा हाथ है !

 

जन्मदिन तो याद नहीं है

उसने कभी मनाया कब था,

आज मनाते पुण्यतिथि हम

अंतिम वह क्षण आया जब था !

 

इतनी घुली-मिली थीं खुद में

जान नहीं पाए तुम क्या थीं,

बच्चों का बस भला चाहतीं

ख्वाहिश और तुम्हारी क्या थी !

 

माँ रब जैसा रखे कलेजा

तभी सभी कुछ सह जाती है,

रेशा-रेशा प्रेम पगा है

बिन बोले सब कह जाती है !

 

सदा नमन करते हैं तुझको

तेरे बहाने हर इक माँ को,

मातृभूमि व मातृभाषा को

जग जननी जगदम्बा माँ को !

 


Thursday, November 27, 2025

जीवन अब इक क्रीड़ा प्रांगण

प्रिय सखी के लिए 
विवाह की वर्षगाँठ पर 
हार्दिक शुभकामनाओं सहित 

संग-संग दुनिया देखी है 
संग-संग हमने सीखा है, 
जिस दिन फेरे लिए अग्नि के 
तेरे सिवा न कुछ परखा है !

मिलन-विरह दोनों रुत आयीं 
ज़िम्मेदारी सभी निभायीं, 
दोनों प्रिय संतान सुखी हैं 
वरदानों सी हमने पायीं !

जीवन अब इक क्रीड़ा प्रांगण 
सारा जग अपना घर लगता, 
देह और मन की सीमाएँ 
तोड़ के नित नव लक्ष्य गढ़ता !

कूदें नील गगन से भू पर 
या सागर में गहरे जायें, 
उर में जोश, शक्ति पाँवों में
नई मंज़िलें तय कर आयें !

Tuesday, November 11, 2025

हर मुश्किल करती आसान

प्रिय भांजी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी 

शुभकामनाओं सहित 


नन्ही बिटिया संग दिन उगता 

खेल-खेल में हुई हर रात, 

काम पे भी जाना होता है 

दिल में भर कितने जज़्बात !


बहनों के संग गपशप होती 

माँ-पापा का आशीष मिले,

प्रियतम का संग भरे ऊर्जा 

अंतर का उपवन सहज खिले !


मोहित, पियु की प्यारी मासी 

सदा रखती उनका हर ध्यान, 

मीठी मुस्कानों से अपनी 

हर मुश्किल करती आसान !


जन्मदिवस पर यही कामना 

बसी रहो यूँ सबके मन में, 

कर्मठता के संस्कार भरो 

छवि की छवि चमके इस जग में !


Saturday, August 23, 2025

तन-मन दोनों फिट रखती हैं

प्रिय सखी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी 

शुभकामनाओं के साथ 

भक्ति भाव से दिल है पूरित 

नित गोविंद के संग रहतीं, 

 किस घड़ी खिलेंगे ब्रह्म कमल

 रातों को सपने हैं बुनती !


सारे बच्चों पर हैं वारी 

उनके आँसूँ देख न पातीं, 

मीलों यात्रायें करके भी 

दौड़-दौड़ कर मिलने जातीं !


 नियमित करतीं योग साधना

तन-मन दोनों फिट रखती हैं, 

सुंदर बने बसेरा जिससे 

घर की ठोक-पीट चलती है !


पाक कला तो आती है पर 

नाम सब होटलों के जानें, 

दूर-सुदूर नयी जगहों पर 

जाने के ढूँढती बहाने !


जन्मदिवस पर ढेर बधाई 

अंतर का उपवन हरा रहे, 

सपने सारे ही पूरे  हों 

हृदय उमंगों से भरा रहे !


Monday, August 4, 2025

तुम हो सारे घर की रौनक़

नन्ही गुड़िया के

पहले जन्मदिन पर 

ठुमक-ठुमक कर चलती घर में 

किलकारी भी गूँज रही है, 

छवि तुम्हारी छवि देखकर 

नानी माँ बस झूम रही है !


एक बरस की आज हुई हो 

माँ-पापा भी वारी जाते, 

बड़ी दुलारी दादी माँ की 

नाना भी तो नाज उठाते ! 


संग भाइयों के सदा खेलो

झटपट अ आ इ ई सीखो, 

गुजराती में बात करो और 

अंग्रेज़ी में गाना सीखो !


तुम हो सारे घर की रौनक़ 

बड़े मज़े से बड़ी हो रही, 

तुतला कर कह देती सब कुछ 

निज पैरों पर खड़ी हो रही !


जन्मदिवस पर खूब बधाई 

खिला रहे मुखड़ा फूलों सा, 

सब के दिल में यही दुआ है 

सुंदर हो हर पल जीवन का !


Sunday, July 27, 2025

अंतिम श्वासें जब आती हों

पापाजी की प्रथम बरसी पर 

विनम्र श्रद्धांजलि स्वरूप 


एक बरस संपूर्ण हुआ है 

सहज ही याद आ रहे आप, 

घर के हर कोने में जैसे 

छायी उन्हीं कदमों की छाप! 


बड़े मज़े से पेपर पढ़ते 

अधलेटे बेड पर लेटे हों, 

हौले-हौले उतरें सीढ़ी 

सोफ़े पर जाकर बैठे हों !


झाड़न लिए हाथ में अपने 

दर-दीवारें साफ़ कर रहे, 

आँगन में फैलाते कपड़े 

मन ही मन कुछ जाप कर रहे !


कभी दूध देते बिल्ली को 

कभी नीर पौधों को देते, 

कितनी छवियाँ मन में आतीं 

दिखते जिनमें बातें करते !


जीवन की हर एक घड़ी का 

आदर किया आपने दिल से, 

अन्तर में सुख बसा हुआ था 

दिन कटते थे ईश स्मरण में !


ऐसे ही हो जीवन अपना 

मरण जहाँ उत्सव बन जाये, 

अंतिम श्वासें जब आती हों 

हाथ दुआ में तब उठ जायें !


Sunday, July 13, 2025

गगन विशाल बसा है मन में

प्रिय पुत्र के लिए 

 जन्मदिन पर ढेर 

सारी शुभकामनाओं और स्नेह सहित 


 सुबह व्यस्त और व्यस्त शाम को  

लेकिन योग साधना जारी, 

जीवन संगिनी साथ हर कदम 

मुखड़े पर मुस्कान है न्यारी !


बाधाएँ कितनी भी आयीं 

 किया सामना अति हिम्मत से 

जन्मदिवस पर ढेर दुआएँ 

देते हैं सब मिलकर दिल से !


भर जाती है पुलक ह्रदय में 

उड़े ड्रोन जब नील नभ में , 

 किंतु याद इसे भी रखना  

 गगन विशाल बसा है मन में   !


देवालय है देह हमारी 

इसका भी कुछ ध्यान करो, 

स्वयं के साथ बिताओ कुछ पल  

जीवन में कुछ गहरे उतरो  !


 भरा हुआ घर उपकरणों से 

तरह-तरह के सामानों से, 

वहाँ जरा सी जगह बनाओ 

मन को भी थोड़ा फैलाओ !