कुछ रिश्ते मीठे से
नये वर्ष में प्रस्तुत है एक नया ब्लॉग....इस ब्लॉग में वे कविताएँ है जो अपने मित्रों सम्बधियों के लिये खास तौर से लिखी गयी हैं, जन्मदिन , विवाह, विवाह की वर्षगाँठ, विदाई आदि के मौकों पर लिखी ये कवितायें शायद आपको भी किसी अपने की याद दिला दें.
Tuesday, September 22, 2026
दिल में प्रेम का स्रोत छिपा है
Thursday, September 10, 2026
वार्षिक मिलन समारोह
OBA साउथ जोन का
वार्षिक मिलन समारोह
मैत्री, स्मृति और आत्मीयता का
एक विशेष दिन आने वाला है
समय ने भले ही दूर कर दिया हो हमें
किंतु साथ बिताये उन दिनों की
जीवंतता को याद दिलाने वाला है !
दिल के रिश्ते कभी पुराने नहीं होते
हाँ, चिरस्थायी अवश्य होते हैं
आइये ! अपनी व्यस्त दिनचर्या से
कुछ पल निकालें
उन यादों को एक बार फिर खँगालें !
वर्षों पुरानी दोस्ती को
एक बार फिर जी लें
उस अनमोल विरासत का
उत्सव मनाने का
मौक़ा न चूकें
जिसने बनाया हमारी यात्रा को
समृद्ध और सफल !
आइये, एक बार फिर साथ बैठें
उन दिनों को याद कर मुस्कुरायें
कुछ न भूलने वाले किस्से
इकदूजे को सुनाएँ
और कुछ नयी यादों को
अपने साथ ले जायें !
क्योंकि यह एक ऐसी मित्रता है
जो कभी फीकी नहीं पड़ती
बल्कि और भी अनमोल होती जाती है !
आपकी गरिमामयी उपस्थिति
और आपके परिवार जनों का साथ
बना देगा विशेष उस दिन को
जब निकलेगी बात से बात !
आइये ! एक बार फिर अतीत के पन्ने पलटें
आत्मीयता के नये सूत्र जोड़ें
नई पीढ़ी को हिस्सा बनने दें इन यादों में
ताकि झलके सदा प्रेम की सुवास
उनके इरादों में !
Thursday, August 27, 2026
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन
माँ, इस बार मैं किसे राखी बाधूँगी ? नन्ही आशा ने प्रश्न भरी नज़रों से जब उसकी तरफ़ देखा तो सीमा के दिल में एक हूक सी उठी। उसका कोई भाई नहीं था, इसकी याद वह हर वर्ष राखी पर दिला देती थी। सीमा भी अपने घर में अकेली थी और उसका पति राजेश भी, इसलिए कोई चचेरा, ममेरा भाई या बहन भी नहीं थे।इसके पहले वे लोग जिस शहर में रहते थे, मकान मालिक के छोटे बेटे को राखी बाँधकर आशा कितनी खुश हुई थी। इस शहर में वे नये-नये आये थे। माँ को चुप देखकर आशा ने उसकी बाँह पकड़ कर हिलाई, तो अचानक जैसे उसे कोई अनोखा हल मिल गया। उसने आशा को अपने साथ आने को कहा और बाज़ार ले जाकर एक दर्जन राखियाँ ख़रीद लीं। मिठाई का एक डिब्बा भी लिया और उनकी कालोनी से सटे उस इलाक़े में जा पहुँची, जहाँ मज़दूरों के घर बने थे। नन्हे-नन्हे कुछ बच्चे वहाँ खेल रहे थे, आशा ने उनकी तरफ़ देखा तो वे भागकर आ गये। उनकी नन्ही कलाइयों पर राखी बाँधते हुए आशा कितनी खुश लग रही थी; और सीमा उसे देखते हुए संतुष्ट थी।
Friday, August 21, 2026
सागर में इक लहर उठी
भाई के जन्मदिन पर
ढेर सारी शुभकामनाओं सहित
मौसम वर्षा का अति भाया है
पूरे परिवार के संग मिलकर इस बार
जन्मदिवस अनोखा मनाया है !
नाती की मुस्कान ने उसमें चार चाँद लगाये
समधियों का आगमन भी
हर्ष का सबब बनकर आया है !
मनभावनी हरियाली में
सुबह-शाम स्वच्छ रास्तों पर टहलना
कभी-कभी दर्शनीय स्थलों पर
भ्रमण करना
जीवन अपने मनहर रूप में
सम्मुख आया है !
तुम्हारे जन्मदिन पर
हम सभी ने यह गीत गाया है !
सागर में इक लहर उठी……
सदा उस अनाम का आशीष पाया है !
Monday, August 17, 2026
सरल जीवन का सुख निरन्तर
जन्मदिन पर
ढेर सारी शुभकामनाओं सहित
जीवन के सातवें दशक में
बस थोड़ा-सा सुकून चाहिए,
थम गयी तीव्र जीवन की गति
अब उत्सव का न शोर चाहिए !
अब कदम कुछ धीरे चलते
शायद उम्र ने सिखा दिया है,
जब जीवन स्वयं धीरे बीते
जल्दी में रखा भी क्या है !
न दूर कहीं जाने की इच्छा
न स्वादिष्ट व्यंजनों की चाह,
न नए वस्त्रों का आकर्षण,
न दिखावे की कोई परवाह !
जो भी मिला वह है पर्याप्त
जो है निकट वही है सुंदर,
अब यह ह्रदय चाहता केवल
सरल जीवन का सुख निरन्तर !
कभी दुनिया जीतने की जो
इक ख्वाहिश दिल में पलती थी,
आज बंद करके वह आँखें
भीतर ही उतरना चाहती !
कुछ पल बैठ ध्यान में ख़ुद से
मिलना अब अच्छा लगता है,
मौन की उस शीतल छाँव में
मन को अपना घर मिलता है !
अब शिकायतें कम हो गयी हैं
अच्छे वैसे लोग हैं जैसे,
कम हुई हैं अपेक्षाएँ भी
लेना-देना नहीं किसी से !
जन्मदिवस पर आज हृदय में
कोई नहीं कामना जगती,
शेष वर्ष संतोष में बीतें
रहे प्रेम और मन में शांति !
नित शांत भोर में भ्रमण करें
साँस कृतज्ञता से भरी हो,
घर का हर कोना स्वच्छ हो
हर शाम प्रार्थना-सी ढली हो !
स्वीकारा सुख से परिवर्तन
उम्र बढ़ रही तो बढ़ने दो,
गरिमामय बने हर मुद्रा
बालों में चाँदी उतरने दो !
चेहरा नहीं, आईने में,
जीवन का अनुभव देखना,
धन्यवाद कहना है कल को
नहीं दौड़ना अब बस चलना !
पाना नहीं, केवल जीना है
नहीं बोलना अब सुनना है,
मन है शांत, हृदय संतुष्ट
जीवन के संग बहना है !
जब जीवन की संध्या आए,
मुस्कुराते हुए कहना है,
“मैंने जीवन भरपूर जिया”,
शेष यहीं समर्पित करना है !
Thursday, July 30, 2026
जीवन को गढ़ती हैं श्वासें
प्रिय बहना के लिए
जन्मदिन पर
ढेर सारी शुभकामनाओं सहित
हँसता हुआ नूरानी चेहरा
अनुशासन का बाँधा सेहरा,
बिटिया होगी अपने घर की
सरवर मन का थिर हो ठहरा !
जैसे ही अभिमान सताये
अलगाव बढ़े, राज खोलती,
सुख खिड़की से उड़ जाता है
गुरुदेव की भाषा बोलती !
भक्तिभाव से अंतर पूरित
जीवन का हर पल है सुंदर,
नये-नये प्रोजेक्ट्स हाथ में
नित निभाये आनंद से भर !
जीवन को गढ़ती हैं श्वासें
अंतर को पढ़ती है आत्मा,
कदम-कदम पर फूल बोध के
खिला ही देता परम आत्मा !
साक्षी का इक दीप जला है
जिसकी आभा में खिलता मन,
सुर-संगीत व चित्रकला में
सहज ही घटता नवीन सृजन !
एक परम उत्साह अनोखा
किसी लोक से बहता आये,
बन विवेक, सौंदर्य अनूठा
जीवन वन को सरसा जाये !
सुख स्वरूप अब ख़ुद को जाना
ध्येय बनाया उसे बाँटना,
शुभ भावों का एक वृक्ष बन
अवांछनीय को नित छाँटना !
Sunday, July 26, 2026
जीवन इक अमोल अवसर है
पापा जी की दूसरी पुण्यतिथि पर
विनम्र श्रद्धांजलि
दो वर्ष बीते कहने को
लगता है यह कल की बात,
घेर आपको सब बैठे थे
आने को थी अंतिम रात !
इधर-उधर की बातें करते
कापी-कलम लिया हाथ में,
अस्पष्ट सी लिखाई लेकिन
थी स्पष्टता हर बात में !
चाय का घूँट वह अंतिम
अंतिम था रात्रि का भोजन,
अर्ध रात्रि को हाथ जोड़कर
जैसे किया आख़िरी निवेदन !
कितने पाठ सिखा गया है
शांतिपूर्ण था वह प्रस्थान,
अंतिम घड़ी में था अधरों पर
उसी परमशिव, ब्रह्म का नाम !
जीवन का हर पल पावन था
मृत्यु भी ऐसी ही पायी,
प्रिय पापाजी सदा आपने
सहज-सजग रह शांति पायी !
आज स्मरण आते हैं वे पल
मोबाइल पर की चर्चाएँ,
जीवन इक अमोल अवसर है
स्मरण आपका याद दिलाये !




