प्रिय बहना के लिए
जन्मदिन पर
ढेर सारी शुभकामनाओं सहित
हँसता हुआ नूरानी चेहरा
अनुशासन का बाँधा सेहरा,
बिटिया होगी अपने घर की
सरवर मन का थिर हो ठहरा !
जैसे ही अभिमान सताये
अलगाव बढ़े, राज खोलती,
सुख खिड़की से उड़ जाता है
गुरुदेव की भाषा बोलती !
भक्तिभाव से अंतर पूरित
जीवन का हर पल है सुंदर,
नये-नये प्रोजेक्ट्स हाथ में
नित निभाये आनंद से भर !
जीवन को गढ़ती हैं श्वासें
अंतर को पढ़ती है आत्मा,
कदम-कदम पर फूल बोध के
खिला ही देता परम आत्मा !
साक्षी का इक दीप जला है
जिसकी आभा में खिलता मन,
सुर-संगीत व चित्रकला में
सहज ही घटता नवीन सृजन !
एक परम उत्साह अनोखा
किसी लोक से बहता आये,
बन विवेक, सौंदर्य अनूठा
जीवन वन को सरसा जाये !
सुख स्वरूप अब ख़ुद को जाना
ध्येय बनाया उसे बाँटना,
शुभ भावों का एक वृक्ष बन
अवांछनीय को नित छाँटना !



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