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Monday, August 17, 2026

सरल जीवन का सुख निरन्तर

जन्मदिन पर

ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 



जीवन के सातवें दशक में 

 बस थोड़ा-सा सुकून चाहिए,

थम गयी तीव्र जीवन की गति 

 अब उत्सव का न शोर चाहिए !

 

अब कदम कुछ धीरे चलते 

 शायद उम्र ने सिखा दिया है,

 जब जीवन स्वयं धीरे बीते 

जल्दी में रखा भी क्या है !


न दूर कहीं जाने की इच्छा

 न स्वादिष्ट व्यंजनों की चाह, 

 न नए वस्त्रों का आकर्षण,

 न दिखावे की कोई परवाह ! 


जो भी मिला वह है पर्याप्त

 जो है निकट वही है सुंदर,

 अब यह ह्रदय चाहता केवल 

 सरल जीवन का सुख निरन्तर !


कभी दुनिया जीतने की जो

इक ख्वाहिश दिल में पलती थी,

 आज बंद करके वह आँखें 

  भीतर ही उतरना चाहती !


 कुछ पल बैठ ध्यान में ख़ुद से

  मिलना अब अच्छा लगता है,

 मौन की उस शीतल छाँव में

 मन को अपना घर मिलता है !

अब शिकायतें कम हो गयी हैं

    अच्छे वैसे लोग हैं जैसे,

 कम हुई हैं अपेक्षाएँ भी

  लेना-देना नहीं किसी से !


जन्मदिवस पर आज हृदय में 

 कोई नहीं कामना जगती,

   शेष वर्ष संतोष में बीतें

 रहे प्रेम और मन में शांति !


 नित शांत भोर में भ्रमण करें 

साँस कृतज्ञता से भरी हो,

घर का हर कोना स्वच्छ हो 

हर शाम प्रार्थना-सी ढली हो !


स्वीकारा सुख से परिवर्तन 

उम्र बढ़ रही तो बढ़ने दो,

गरिमामय बने हर मुद्रा 

बालों में चाँदी उतरने दो !


  चेहरा नहीं, आईने में,

 जीवन का अनुभव देखना,

  धन्यवाद कहना है कल को 

नहीं दौड़ना अब बस चलना !

 

 पाना नहीं, केवल जीना है

नहीं बोलना अब सुनना है,

मन है शांत,
हृदय संतुष्ट   

जीवन के संग बहना है !

 

जब जीवन की संध्या आए,

 मुस्कुराते हुए कहना है,

“मैंने जीवन भरपूर जिया”,


शेष यहीं समर्पित करना है !

 

Sunday, July 13, 2025

गगन विशाल बसा है मन में

प्रिय पुत्र के लिए 

 जन्मदिन पर ढेर 

सारी शुभकामनाओं और स्नेह सहित 


 सुबह व्यस्त और व्यस्त शाम को  

लेकिन योग साधना जारी, 

जीवन संगिनी साथ हर कदम 

मुखड़े पर मुस्कान है न्यारी !


बाधाएँ कितनी भी आयीं 

 किया सामना अति हिम्मत से 

जन्मदिवस पर ढेर दुआएँ 

देते हैं सब मिलकर दिल से !


भर जाती है पुलक ह्रदय में 

उड़े ड्रोन जब नील नभ में , 

 किंतु याद इसे भी रखना  

 गगन विशाल बसा है मन में   !


देवालय है देह हमारी 

इसका भी कुछ ध्यान करो, 

स्वयं के साथ बिताओ कुछ पल  

जीवन में कुछ गहरे उतरो  !


 भरा हुआ घर उपकरणों से 

तरह-तरह के सामानों से, 

वहाँ जरा सी जगह बनाओ 

मन को भी थोड़ा फैलाओ !