जन्मदिन पर
ढेर सारी शुभकामनाओं सहित
जीवन के सातवें दशक में
बस थोड़ा-सा सुकून चाहिए,
थम गयी तीव्र जीवन की गति
अब उत्सव का न शोर चाहिए !
अब कदम कुछ धीरे चलते
शायद उम्र ने सिखा दिया है,
जब जीवन स्वयं धीरे बीते
जल्दी में रखा भी क्या है !
न दूर कहीं जाने की इच्छा
न स्वादिष्ट व्यंजनों की चाह,
न नए वस्त्रों का आकर्षण,
न दिखावे की कोई परवाह !
जो भी मिला वह है पर्याप्त
जो है निकट वही है सुंदर,
अब यह ह्रदय चाहता केवल
सरल जीवन का सुख निरन्तर !
कभी दुनिया जीतने की जो
इक ख्वाहिश दिल में पलती थी,
आज बंद करके वह आँखें
भीतर ही उतरना चाहती !
कुछ पल बैठ ध्यान में ख़ुद से
मिलना अब अच्छा लगता है,
मौन की उस शीतल छाँव में
मन को अपना घर मिलता है !
अब शिकायतें कम हो गयी हैं
अच्छे वैसे लोग हैं जैसे,
कम हुई हैं अपेक्षाएँ भी
लेना-देना नहीं किसी से !
जन्मदिवस पर आज हृदय में
कोई नहीं कामना जगती,
शेष वर्ष संतोष में बीतें
रहे प्रेम और मन में शांति !
नित शांत भोर में भ्रमण करें
साँस कृतज्ञता से भरी हो,
घर का हर कोना स्वच्छ हो
हर शाम प्रार्थना-सी ढली हो !
स्वीकारा सुख से परिवर्तन
उम्र बढ़ रही तो बढ़ने दो,
गरिमामय बने हर मुद्रा
बालों में चाँदी उतरने दो !
चेहरा नहीं, आईने में,
जीवन का अनुभव देखना,
धन्यवाद कहना है कल को
नहीं दौड़ना अब बस चलना !
पाना नहीं, केवल जीना है
नहीं बोलना अब सुनना है,
मन है शांत, हृदय संतुष्ट
जीवन के संग बहना है !
जब जीवन की संध्या आए,
मुस्कुराते हुए कहना है,
“मैंने जीवन भरपूर जिया”,
शेष यहीं समर्पित करना है !
