Thursday, August 27, 2026

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन 



माँ, इस बार मैं किसे राखी बाधूँगी ? नन्ही आशा ने प्रश्न भरी नज़रों से जब उसकी तरफ़ देखा तो सीमा के दिल में एक हूक सी उठी। उसका कोई भाई नहीं था, इसकी याद वह हर वर्ष राखी पर दिला देती थी। सीमा भी अपने घर में अकेली थी और उसका पति राजेश भी, इसलिए कोई चचेरा, ममेरा भाई या बहन भी नहीं थे।इसके पहले वे लोग जिस शहर में रहते थे, मकान मालिक के छोटे बेटे को राखी बाँधकर आशा कितनी खुश हुई थी। इस शहर में वे नये-नये आये थे। माँ को चुप देखकर आशा ने उसकी बाँह पकड़ कर हिलाई, तो अचानक जैसे उसे कोई अनोखा हल मिल गया। उसने आशा को अपने साथ आने को कहा और बाज़ार ले जाकर एक दर्जन राखियाँ ख़रीद लीं। मिठाई का एक डिब्बा भी लिया और उनकी कालोनी से सटे उस इलाक़े में जा पहुँची, जहाँ मज़दूरों के घर बने थे। नन्हे-नन्हे कुछ बच्चे वहाँ खेल रहे थे, आशा ने उनकी तरफ़ देखा तो वे भागकर आ गये। उनकी नन्ही कलाइयों पर राखी बाँधते हुए आशा कितनी खुश लग रही थी; और सीमा उसे देखते हुए संतुष्ट थी।  


6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 30 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

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    1. बहुत बहुत आभार रवींद्र जी!

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  2. वाह! बहुत सुंदर !



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