Friday, March 4, 2022

जन्मदिन मुबारक हो



प्रिय भांजी के लिए


अखियों में बसा इंतजार

कब आयेगा राजकुमार,

ले जायेगा सँग में उसको

और जताएगा इकरार !

 

दर्पण में निहारे खुद को

सुंदर पाया चेहरा मोहरा,

अध्ययन तो हो गया पूरा

कब छंटेगा दिल से कोहरा !

 

स्कूल में थी तो दौड़ लगाती

अब दौड़ने से घबराए,

बॅाली-बॉल, कबड्डी खेली

सँग सखियों के मौज मनाये !

 

अब ‘अनोखी’ सँग दोस्ती

एस.एम.एस. के तोड़े रिकॉर्ड,

चेतन भगत प्रिय लेखक है

याद किया करती है गॅाड !

 

पावभाजी जब मिल जाये

मुख में पानी भर भर जाये,

हर गुरुवार को मंदिर जाके

शिरडी सांई को रिझाये !


Thursday, February 24, 2022

ऐसे ही मुस्कान बिखराओ

प्रिय ननद के लिए 

जन्मदिन पर शुभकामनाओं सहित 


​​अन्नपूर्णा सी हर मन तृप्त करती 

नए-नए पकवानों से घर-बाहर 

सबकी क्षुधा शांत करती 

खाखरा, थेपला, खमण ढोकला, ईदड़ा,

खांडवी, फ़ाफड़ा और दाल-पकवान 

बनाती बासुंदी, सेव की मिठाई, 

चकली और फरसान 

इसी तरह घर में भरी रहे महक 

पारंपरिक व्यंजनों की 

बहुत बहुत बधाई हो तुम्हें जन्मदिन की ! 

गुरु पर आस्था और आत्मज्ञान पर विश्वास 

जीवन के हर इम्तहान में करते आए हैं पास 

अति धैर्य से जीवनसंगी का 

हर सुख-दुःख में साथ निभाती 

पुत्रियों के सुखमय भविष्य की 

हर श्वास में कामना करती 

नन्हें नातियों की प्रिय नानी 

बचपन में माँ जिसको  बुलाती थीं प्यार से रानी 

खुश रहो हमेशा  ऐसे ही मुस्कान बिखराओ  

अपनी सहज मुद्रा से हँसी की फुलझड़ी जलाओ 

आज हम मिलकर शुभकामना देते हैं 

सपने पूरे हों दिल के सभी 

रब से यही दुआ करते हैं !


Thursday, February 17, 2022

जीवन में विवेक जब जागे

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 


बचपन की याद का घरौंदा 

अंतर्मन में एक बसा है, 

कृतज्ञता का भाव जगा तो 

हर अलगाव यूँही बहा है !  


जीवन में विवेक जब जागे 

उर में पावन प्रेम निखरता, 

सत्य-असत, शाश्वत-नश्वर का 

अंतर उर में स्वयं प्रकटता !


जीवन में अनुशासन आया 

प्रकृति प्रेम हर भोर बुलाए, 

दूर-दूर तक भ्रमण चले या 

बगिया में कुछ फूल उगाए !


सुर-ताल की जमी है महफ़िल 

सदा बाँटने से सुख बढ़ता,    

ध्यान-योग के सत्र भी चलें 

है द्वार सदन का सदा खुला !


कुछ नवीन करने का जज़्बा 

जीवन को नव अर्थ दे रहा, 

छुपी हुई प्रतिभा भी जागी 

काव्य कला में हाथ सध रहा !


सृजन, ध्यान, चिंतन या भोजन 

हर मोड़ पर साथ परिवार, 

पुत्रियों को संस्कार मिल रहे 

प्रिया के दिल को ख़ुशी अपार !


जन्मदिवस पर यही कामना 

स्वप्न सभी साकार हो सकें, 

गहराई ऐसी हो मन में 

जीवन निज हर मर्म जता दे !


Thursday, February 10, 2022

स्वप्न पूर्ण हों इसी तरह सब

छोटी बहन के लिए 

विवाह की वर्षगाँठ पर 

 

इक दूजे को सदा खुश रखें 

यही प्रयास चला करता है,

जीवन के क्रम चलते रहते

यह दिन भला-भला लगता है !


नयी चुनौती लेने ख़ातिर 

दोनों आज खड़े हैं पथ पर,

परीक्षा की तैयारी है 

रेस्त्राँ भी खुलने को तत्पर !


जैसे जैसे बढ़ा तजुर्बा 

नयी नयी योजना बनायीं, 

अपनी मेहनत के बल पर ही 

आज हक़ीक़त में उतारीं !


नियमित चले साधना घर में 

बगिया में  फूलों की शान, 

बिटिया संग मनेगा शुभ दिन 

थोड़े से होंगे मेहमान !


हम सब यही दुआ करते हैं 

स्वप्न पूर्ण हों इसी तरह सब, 

उन्नति के शिखरों को छू लो 

संग सदा हैं गुरू और रब !





Sunday, January 30, 2022

जन्मदिन की कविता

प्रिय भांजी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ 

आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरा मन 

नए युग की पहचान हो तुम ! 

 शिक्षा और संस्कारों का 

भरपूर उपयोग करती 

छोटी बहन व माँ-पापा की जान हो तुम !

सदा निस्वार्थ सहयोग और प्रेम लुटाती 

सखियों और सह कर्मियों के प्रति 

कार्य स्थल की शान हो तुम !

साधना का पथ जो चुना है 

उस पर चलती रहना, 

बाहर देखने से पहले 

हर उलझन का कारण भीतर देखना !

क्योंकि जानती हो तुम 

सब सवालों के जवाब वहीं मिलते हैं 

श्रद्धा और प्रार्थना के दीप जहाँ जलते हैं ! 


Thursday, December 2, 2021

नन्हा-मुन्ना सा एक बालक


प्रिय प्रियांश के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 

नन्हा-मुन्ना सा एक बालक 

दिन भर घर में दौड़े भागे, 

कार्टून का है दीवाना 

टीवी देखे जब भी जागे !


नज़रें बहुत तेज हैं उसकी 

भाई की हर नक़ल उतारे, 

नाना-नानी, मासी सबको 

दे दे कर आवाज़ पुकारे !


घर के कितने काम जानता 

मैगी, ओट्स बहुत भाते हैं,

कोई अगर ज़रा भी टोके 

झट से आँसूँ आ जाते हैं !


बहुत सारा चाहिए उसको 

खेल हो या नाना का साथ, 

बड़ी मौसी संग खेले खेल  

छोटी के संग पढ़े किताब !


अपनी बात का पक्का है वह 

पियु पियु की बस रटन लगाता, 

सबको आँखों का तारा है 

भाई का संग उसको भाता !


Tuesday, November 30, 2021

रब पर भरोसा कर लिया

पापा जी के लिए 


रब पर भरोसा कर लिया

घर से  हुए बेघर तब किशोर ही तो थे 

छोटी सी उम्र में भी हौसले बड़े थे 


काम दिन में कई, की रातों को पढ़ाई 

निभाया साथ माँ-बाप का पुत्र बड़े थे 


सहा दुःख लाड़ली बिटिया के बिछड़ने का 

आँसू उन आँखों के थमते ही नहीं थे 


अनुजों को दिया था हर तरह का सहारा 

भरोसे ऐसे पाले कि टूटे नहीं थे 


पिता का साया उठा माँ की दुआएँ थीं 

वह जब गयीं परिवार के मुखिया बने थे 


बीच राह में संगिनी भी साथ छोड़ गयी 

बच्चों के चेहरे देख ज़ख़्म सी लिए थे 


दो भाई, एक बहन ने अंतिम विदा ली  

रब पर भरोसा कर लिया बिखरे नहीं थे