Thursday, July 30, 2026

जीवन को गढ़ती हैं श्वासें

प्रिय बहना के लिए 

जन्मदिन पर 

ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 


हँसता हुआ नूरानी चेहरा 

अनुशासन का बाँधा सेहरा,

बिटिया होगी अपने घर की 

 सरवर मन का थिर हो ठहरा !


जैसे ही अभिमान सताये 

अलगाव बढ़े, राज खोलती,  

सुख खिड़की से उड़ जाता है 

गुरुदेव की भाषा बोलती !


भक्तिभाव से अंतर पूरित 

जीवन का हर पल है सुंदर, 

नये-नये प्रोजेक्ट्स हाथ में 

नित  निभाये आनंद से भर !


जीवन को गढ़ती हैं श्वासें 

अंतर को पढ़ती है आत्मा, 

कदम-कदम पर फूल बोध के 

खिला ही देता परम आत्मा !


साक्षी का इक दीप जला है 

जिसकी आभा में खिलता मन,

सुर-संगीत व चित्रकला में 

सहज ही घटता नवीन सृजन ! 


एक परम उत्साह अनोखा 

किसी लोक से बहता आये, 

बन विवेक, सौंदर्य अनूठा 

जीवन वन को सरसा जाये !


सुख स्वरूप अब ख़ुद को जाना 

ध्येय बनाया उसे बाँटना, 

 शुभ भावों का एक वृक्ष बन 

अवांछनीय को नित छाँटना !

 

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