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Sunday, April 15, 2018

गुड्डू और फार्ज़ी का घर


गुड्डू और फार्ज़ी का घर





जहाँ बेरोकटोक बहती है हवा अपनत्व की,
 मित्र परिवार ही बन गए हैं और ....
परिवार का स्वागत मित्रों की तरह किया जाता है 
सभी भेद भुलाकर अपना बना लिया है कर्मियों को 
जहाँ दो मन एक हो गए हैं
समरसता का संगीत जहां हर पल गूँजता है
जहाँ समृद्धि का साम्राज्य है
भरा रहता है अन्न-जल का भंडार
विशाल है हृदयों का प्राँगण
प्रीत और समझ की बुनियाद पर टिका है जो
उस सुंदर घर पर सदा है कृपा अस्तित्व की
शामिल है दुआ जिसमें हर परिजन की !