प्रिय पुत्र के लिए
जन्मदिन पर ढेर
सारी शुभकामनाओं और स्नेह सहित
सुबह व्यस्त और व्यस्त शाम को
लेकिन योग साधना जारी,
जीवन संगिनी साथ हर कदम
मुखड़े पर मुस्कान है न्यारी !
बाधाएँ कितनी भी आयीं
किया सामना अति हिम्मत से
जन्मदिवस पर ढेर दुआएँ
देते हैं सब मिलकर दिल से !
भर जाती है पुलक ह्रदय में
उड़े ड्रोन जब नील नभ में ,
किंतु याद इसे भी रखना
गगन विशाल बसा है मन में !
देवालय है देह हमारी
इसका भी कुछ ध्यान करो,
स्वयं के साथ बिताओ कुछ पल
जीवन में कुछ गहरे उतरो !
भरा हुआ घर उपकरणों से
तरह-तरह के सामानों से,
वहाँ जरा सी जगह बनाओ
मन को भी थोड़ा फैलाओ !
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यह कविता आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी को बहुत सलीके से पकड़ती है। आप व्यस्त सुबह-शाम के बीच योग और संतुलन की बात बड़ी सहजता से कहते हो। चुनौतियों का ज़िक्र हिम्मत और सकारात्मकता दिखाता है। कुल मिलाकर यह रचना रुककर खुद को सुनने की सच्ची सलाह देती है।
ReplyDeleteस्वागत व आभार!
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