Friday, October 29, 2010

जन्मदिन पर शुभकामनायें

 जन्मदिवस पर ढेरों शुभकामनाओं तथा स्नेह सहित

मन में समता, बुद्धि निर्मल
हो आत्मा में भरा आनंद
तन स्वस्थ हो अन्न शुद्ध हो
जन्म दिन मने सानंद I

श्वास में कम्पन न होता हो
द्वंद में ऊर्जा नहीं बहे
समय व्यर्थ न इक पल जाये
लक्ष्य से न नजर हटे I

सखियों संग  भी समरसता हो
न दुःख लेना न दुःख देना
अपना पात्र निभे ठीक से
जीवन को बस ड्रामा लेना I

भय से मुक्त हो चित्त सदा ही
अभय सदा औरों को देना
अंतर्मन की शांत अवस्था
जग पर कभी न निर्भर करना I

ऐसे जीना खिला कुसुम ज्यों
रहे बाँटता प्रेम सुगंध
दिल से निकली आज दुआएं
जन्म दिन का करो प्रबंध I


दूर देश से दुलियाजान

दूर देश  से दुलियाजान

दूर देश से उड़कर आयीं खिलखिलाती दो लड़कियां
मधुर स्वरों में सुरमयी सरगम गुनगुनातीं सी परियां  

जैसे फूलों के झुरमुट पर मंडराती रंगीन तितलियां
या फिर नीले नीले जल में छपछप करती हुई मछलियां

सुर गूंजते अब तक उनके हरी घास, वृक्षों, पत्तों में
स्वप्नों के से बीते वे दिन रौनक लगा गयीं घर में

गीत सुनातीं पोज बनातीं सारे घर में धूम मचातीं
रंगबिरंगे वस्त्र पहन कर खुशबू की लपटें फैलातीं

अधरों पर लिप ग्लास सजे आँखों में काजल शैडो भी
बेहतरीन परफ्यूम डियो बालों में क्लिप व क्लच भी

यानि की वे सुघड़ बड़ी थीं आँखें उनकी बड़ी-बड़ी थीं
एक सांवली दूजी गोरी पाककला में निपुण बड़ी थीं

स्नेह लुटातीं मिलतीं जिससे बातों में न कोई जीते
याद आ रहे पल वे सारे उनके संग दिन उड़ते बीते

संग आयीं थीं माँ के जो माँ से ज्यादा थी सहेली
एक अनोखी सी डाक्टर, स्वप्निल, प्रेमिल, उत्साही

गालों पर पड़ते हैं जिसके गड्ढे दो नन्हें से प्यारे
बातों में जिसकी मोहकता, भोलापन हर अदा संवारे

सेवा भाव भरा है भीतर स्नेह लुटाती अनजानों पर
ज्ञान दिया बच्चों को दिल से दी भेंट सहज होकर

हारमोनियम पर सुर साधा संगत कर तबले पर थाप
भजन, प्रार्थना मिल कर गाये आँख मूंद छेड़ा आलाप

धर्म और अध्यात्म पे चर्चा ध्यान योग भी खूब किया
अंतर्शक्ति जगाने स्वयं को परम तत्व से चार्ज किया

हरे भरे मैदानों में संग घूमे अनगिन चित्र उतारे
तेलकूप से ओसीएस तक रॉड पम्प के लिये नजारे

चाय बागानों में सर पे उठा टोकरी पत्तियाँ तोड़ी  
बच्चों संग कच्ची पुलिया पर सज उठी बहनों की जोड़ी

घंटी वाले मंदिर में मन्नत मांग आरती सजाई 
और झील में गाते-गाते पैडल वाली नाव चलाई

फूलों वाले रस्ते गुजरे तितलियों संग गुफ्तगू की
जाने कितनी बार निहारा कुदरत की इबादत की

कैरम खेला, बॉनवॉयज भी बैडमिंटन पर हाथ जमाया
प्रातः भ्रमण किया छाते लेकर वर्षा का आनंद उठाया

मन में श्रद्धा व विश्वास प्रतिपल नया सीखने की आस
जीवन में कुछ कर दिखलाना याद दिलाती है हर श्वास







  


शुभ विवाह

शुभ विवाह

निधि पाता है प्रबल ही, जग की ऐसी रीत
जो विनीत हो यश मिले, बलवानों को प्रीत I

लखनऊ में विद्या मिली, नोएडा में रोजगार
भाग्य बड़ा ही है प्रबल, गया पूना में दिल हार I

सूरत से आयी निधि, अति सुंदर है मेल
एमबीए दोनों मिले, सौभाग्य का खेल I

शिपयार्ड में पिता हैं, माँ डॉक्टर प्रोफेसर
नाजों से पली निधि, लगे न कोई नजर I

पारुल पाती भेज के, सबको रही बुलाय
भाभी पाने की खुशी, मन में नहीं समाय I

घर में शादी आ गयी, पड़ा मलेशिया टूर
दफ्तर में भी काम बढा, परीक्षाएं न दूर I

मामा-मामी मग्न हुए, अभिनव-रिया के संग
दुलियाजान से जा पहुँचे, मन में भरे उमंग I

आयी बेला मिलन की, चारों ओर उमंग
शुभ विवाह के ढोल बजे, शहनाई की तरंग I

आये देस-विदेस से, रिश्तेदार अनेक
शादी वाले गांव में, हुए सभी हैं एक I

अवसर बड़ा विशेष है, कितने हुए प्रबंध
परिवारों में जुड़ रहे, नए-नए सम्बन्ध I

मंजीरे भी बज उठे, मेंहदी करे किलोल
गीत सुहाग के गा रहीं, बुआ, चाची, डोल I

दिल्ली से बारात चली, नोएडा पहुंची जाय
मॉर्डन है स्कूल यहाँ, अरुण विहार बुलाय I

लें बधाई आप सब, झोली भर-भर आज
नवजीवन सुखमय रहे, पूर्ण हों सब काज I



 


कुछ दोहे प्रीत भरे

कुछ दोहे प्रीत भरे


भैया-भाभी आ रहे बिटिया के संग आज
मन में उठी उमंग का असल यही है राज I

छोटी भाभी साथ है दुगना है उल्लास
पलक पांवड़े बिछा रही मन में खिली पलास I

दिल्ली दुलियाजान का हुआ मिलन है आज
शुभ दिन है शुभ घड़ी भी हुआ चैत्र आगाज I

सुमन खिले चहुँ दिशा में ऋतु नरेश का काल
हर्षित भई आराधिका रेखा क्षितिज की लाल I

दिगबोई में चित्र लिए डिब्रुगढ़ से ट्रेन
गोहाटी में कर दर्शन पाया दिल का चैन I

मेघालय जा पहुंचे अब शोभित किया शिलौंग
सुख उजाला बरस रहा है दिनेश का संग I

घर अब देखो बुला रहा यात्रा करें समाप्त
यादें मधुर समेट दिलों में खुशियाँ कर लें प्राप्त I












Thursday, October 28, 2010

माँ व पिता जी

जन्मदिन के अवसर पर  शुभकामनाओं सहित

एकदूजे के लिये बने हैं
एकदूजे का साथ निभाते
रात और दिन साथ साथ रह
जग में एक मिसाल बनाते I

सुबह सवेरे लान में टहलें
 ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाते
समय से करते हर एक काम
सलीके से सब कुछ निपटाते I

शांत सरल स्वभाव है उनका
बच्चों की ही चिंता करते
अपनी क्षमता से बढकर
घर के काम में हाथ बंटाते I

साठ बरस का साथ अनोखा
 एकदूजे की आदत जानें
सुख में दुःख में साथ निभाया
 दिल से दिल को पहचानें I

कभी-कभी झुंझलाते पापा
झूठ-मूठ जब माँ डर जातीं
जाने क्यों शंका है मन में
हर पल नजर टिकाये रहतीं I

प्रेम जीतता आया जग में
सेवा से हर रोग हारता
सौ बरस हो उम्र आपकी
हम सबका दिल यही मांगता I


सौमित्र जी

जन्म दिवस पर शुभकामनाओं सहित

एक यात्रा का शुभारंभ एक कहानी शुरू हुई
बरसों पूर्व आज के दिन यह रवानी शुरू हुई I

जाने कितने अनुभव पा उम्र पंछी हर वर्ष थमे  
एक पड़ाव पुनः मिला है मन मतवाला मुग्ध रमे I  

कलाकार की दृष्टि पाई मेधा है वैज्ञानिक की
अर्थशास्त्र की सूझबूझ भी बड़ी सजगता ग्राहक की I

नपातुला सा भोजन अपना नपातुला बस हो व्यायाम
टीवी पर बस रोक नहीं है बाकि नियमित सारे काम I

या फिर अपनी नजर टिकी है लेंस के पीछे से जग पर
बादल, पंछी, प्रकृति सुंदर या मानव कृत रचनाओं पर I

सुविधा पहले जेब बाद में कितने सेट टिकटों के लें
पूजा हो या उत्सव कोई उपहारों से घर भर दें I

यानि कि जीवन रसमय है प्रिया संग सुंदर यात्रा 
माँ का ध्यान सदा रहता है बिटिया एमबीए छात्रा I

जन्म दिवस पर ढेर बधाई हम सब शुभचितंक लाए
हों लजीज पकवान सामने बार-बार यह दिन आये I











इति जी

इति
आदि न जिसका इति हो कैसे
इति उसी की जो परिवर्तित
मर कर भी जो शेष रहा है
वही आत्मा है जग पूजित I

प्रिय नाम इति किया सार्थक
सत्य साधिका, मधुर भाषिणी
वर्ण सुनहरा, गहरी आँखें
अल्प वाचिका, पुरी वासिनी I

तेरह बरस की निष्ठा अनुपम
गुरु ज्ञान का करती वितरण
एओल की पूर्ण शिक्षिका
जीवन सत् को किया समर्पण I

बाल्यावस्था थी कोमल जब
संतों के दर्शन करवाए
रामकृष्ण मिशन चलाते
संस्कार पिता से पाए I

कहा किसी ने देख लकीरें
प्रभु के पथ की है गामिनी
किन्तु इति सामान्य बालिका
जग की भी तब अभिलाषिणी I

गुरु दर्शन का अनुभव अतुलित
बैंगलोर गयी विधि सीखने
दिशा बदल गयी तब जीवन की
छोड़ दिए आग्रह सब मन ने I

तब से घूमे नगर नगर में
सारा जग अब मीत बना है
सहज सिखाती सहज ही रहती
इति से मिलना सुख सपना है I