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Friday, October 29, 2010

लावण्या

लावण्या

रंगत गोरी शहद सी बोली
लावण्या दिखती है भोली
तेज दिमाग दिल कलात्मक
उर्वर मेधा है रचनात्मक I

माँ जैसी वह है इमोशनल
तैरे जैसे कोई प्रोफेशनल
फटफट कर सब्जियां काटे
फेसबुक पर सूचनायें बाटें I

पोज बनती झट से सुंदर
गीत फूटते ज्यों हो निर्झर
कभी-कभी झगड़े दीदी से
जुड़ा है गहरा जिससे दिल पर I

एक सी हैं बचपन की यादें
साथ साथ जीने के वादे
पापा से बतियाती है जब
दुनिया को भुलाती है तब I

लावण्या, तुम हो अति प्यारी
नजर लगे न कभी हमारी
इसी तरह लिखती भी रहना
चमके एक दिन कलम तुम्हारी !





दूर देश से दुलियाजान

दूर देश  से दुलियाजान

दूर देश से उड़कर आयीं खिलखिलाती दो लड़कियां
मधुर स्वरों में सुरमयी सरगम गुनगुनातीं सी परियां  

जैसे फूलों के झुरमुट पर मंडराती रंगीन तितलियां
या फिर नीले नीले जल में छपछप करती हुई मछलियां

सुर गूंजते अब तक उनके हरी घास, वृक्षों, पत्तों में
स्वप्नों के से बीते वे दिन रौनक लगा गयीं घर में

गीत सुनातीं पोज बनातीं सारे घर में धूम मचातीं
रंगबिरंगे वस्त्र पहन कर खुशबू की लपटें फैलातीं

अधरों पर लिप ग्लास सजे आँखों में काजल शैडो भी
बेहतरीन परफ्यूम डियो बालों में क्लिप व क्लच भी

यानि की वे सुघड़ बड़ी थीं आँखें उनकी बड़ी-बड़ी थीं
एक सांवली दूजी गोरी पाककला में निपुण बड़ी थीं

स्नेह लुटातीं मिलतीं जिससे बातों में न कोई जीते
याद आ रहे पल वे सारे उनके संग दिन उड़ते बीते

संग आयीं थीं माँ के जो माँ से ज्यादा थी सहेली
एक अनोखी सी डाक्टर, स्वप्निल, प्रेमिल, उत्साही

गालों पर पड़ते हैं जिसके गड्ढे दो नन्हें से प्यारे
बातों में जिसकी मोहकता, भोलापन हर अदा संवारे

सेवा भाव भरा है भीतर स्नेह लुटाती अनजानों पर
ज्ञान दिया बच्चों को दिल से दी भेंट सहज होकर

हारमोनियम पर सुर साधा संगत कर तबले पर थाप
भजन, प्रार्थना मिल कर गाये आँख मूंद छेड़ा आलाप

धर्म और अध्यात्म पे चर्चा ध्यान योग भी खूब किया
अंतर्शक्ति जगाने स्वयं को परम तत्व से चार्ज किया

हरे भरे मैदानों में संग घूमे अनगिन चित्र उतारे
तेलकूप से ओसीएस तक रॉड पम्प के लिये नजारे

चाय बागानों में सर पे उठा टोकरी पत्तियाँ तोड़ी  
बच्चों संग कच्ची पुलिया पर सज उठी बहनों की जोड़ी

घंटी वाले मंदिर में मन्नत मांग आरती सजाई 
और झील में गाते-गाते पैडल वाली नाव चलाई

फूलों वाले रस्ते गुजरे तितलियों संग गुफ्तगू की
जाने कितनी बार निहारा कुदरत की इबादत की

कैरम खेला, बॉनवॉयज भी बैडमिंटन पर हाथ जमाया
प्रातः भ्रमण किया छाते लेकर वर्षा का आनंद उठाया

मन में श्रद्धा व विश्वास प्रतिपल नया सीखने की आस
जीवन में कुछ कर दिखलाना याद दिलाती है हर श्वास







  


शुभ विवाह

शुभ विवाह

निधि पाता है प्रबल ही, जग की ऐसी रीत
जो विनीत हो यश मिले, बलवानों को प्रीत I

लखनऊ में विद्या मिली, नोएडा में रोजगार
भाग्य बड़ा ही है प्रबल, गया पूना में दिल हार I

सूरत से आयी निधि, अति सुंदर है मेल
एमबीए दोनों मिले, सौभाग्य का खेल I

शिपयार्ड में पिता हैं, माँ डॉक्टर प्रोफेसर
नाजों से पली निधि, लगे न कोई नजर I

पारुल पाती भेज के, सबको रही बुलाय
भाभी पाने की खुशी, मन में नहीं समाय I

घर में शादी आ गयी, पड़ा मलेशिया टूर
दफ्तर में भी काम बढा, परीक्षाएं न दूर I

मामा-मामी मग्न हुए, अभिनव-रिया के संग
दुलियाजान से जा पहुँचे, मन में भरे उमंग I

आयी बेला मिलन की, चारों ओर उमंग
शुभ विवाह के ढोल बजे, शहनाई की तरंग I

आये देस-विदेस से, रिश्तेदार अनेक
शादी वाले गांव में, हुए सभी हैं एक I

अवसर बड़ा विशेष है, कितने हुए प्रबंध
परिवारों में जुड़ रहे, नए-नए सम्बन्ध I

मंजीरे भी बज उठे, मेंहदी करे किलोल
गीत सुहाग के गा रहीं, बुआ, चाची, डोल I

दिल्ली से बारात चली, नोएडा पहुंची जाय
मॉर्डन है स्कूल यहाँ, अरुण विहार बुलाय I

लें बधाई आप सब, झोली भर-भर आज
नवजीवन सुखमय रहे, पूर्ण हों सब काज I