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Friday, October 29, 2010

शुभ विवाह

शुभ विवाह

निधि पाता है प्रबल ही, जग की ऐसी रीत
जो विनीत हो यश मिले, बलवानों को प्रीत I

लखनऊ में विद्या मिली, नोएडा में रोजगार
भाग्य बड़ा ही है प्रबल, गया पूना में दिल हार I

सूरत से आयी निधि, अति सुंदर है मेल
एमबीए दोनों मिले, सौभाग्य का खेल I

शिपयार्ड में पिता हैं, माँ डॉक्टर प्रोफेसर
नाजों से पली निधि, लगे न कोई नजर I

पारुल पाती भेज के, सबको रही बुलाय
भाभी पाने की खुशी, मन में नहीं समाय I

घर में शादी आ गयी, पड़ा मलेशिया टूर
दफ्तर में भी काम बढा, परीक्षाएं न दूर I

मामा-मामी मग्न हुए, अभिनव-रिया के संग
दुलियाजान से जा पहुँचे, मन में भरे उमंग I

आयी बेला मिलन की, चारों ओर उमंग
शुभ विवाह के ढोल बजे, शहनाई की तरंग I

आये देस-विदेस से, रिश्तेदार अनेक
शादी वाले गांव में, हुए सभी हैं एक I

अवसर बड़ा विशेष है, कितने हुए प्रबंध
परिवारों में जुड़ रहे, नए-नए सम्बन्ध I

मंजीरे भी बज उठे, मेंहदी करे किलोल
गीत सुहाग के गा रहीं, बुआ, चाची, डोल I

दिल्ली से बारात चली, नोएडा पहुंची जाय
मॉर्डन है स्कूल यहाँ, अरुण विहार बुलाय I

लें बधाई आप सब, झोली भर-भर आज
नवजीवन सुखमय रहे, पूर्ण हों सब काज I