नये वर्ष में प्रस्तुत है एक नया ब्लॉग....इस ब्लॉग में वे कविताएँ है जो अपने मित्रों सम्बधियों के लिये खास तौर से लिखी गयी हैं, जन्मदिन , विवाह, विवाह की वर्षगाँठ, विदाई आदि के मौकों पर लिखी ये कवितायें शायद आपको भी किसी अपने की याद दिला दें.
Sunday, February 10, 2019
शुभकामनायें
Friday, February 1, 2019
है कृतज्ञ हो जाने का दिन
जन्मदिन पर
माँ की उंगली पकड़
के तुमने
जिस दिन चलना
सीखा था,
पिता के कांधे पर
पर चढ़ कर
इस दुनिया को
देखा था !
आज स्मरण करने का
दिन वे
आगे पीछे घूमा
करते,
बात तुम्हारे मुख
से निकली
बड़े प्यार से
पूरा करते !
आज खड़ी निज पैरों
पर तुम,
उनको तुम पर गर्व
हो रहा,
एक समर्थ सजग
बिटिया को
देख-देख कर हर्ष
हो रहा !
है कृतज्ञ हो
जाने का दिन
हाथ जोड़ मन्दिर
में जाना,
समृद्धि वैभव जो
भी पाया
धन्यवाद दे उसे
जताना !
जन्मदिवस पर यह
भी सोचें
नूतन वर्ष मिला
जो आगे,
बने योजना कुछ
ऐसा हो
जिससे अंतर्मन यह
जागे !
Sunday, January 20, 2019
शुभकामनायें
विवाह की वर्षगांठ पर
दिल उमगे मुस्कान
अधर पर
चौदह वर्ष का सँग
साथ है,
प्रिय बिटिया मिली
परियों सी
निशदिन ही हाथ
में हाथ है !
देहरादून देव
भूमि में
परिवार संग मिलन
मनाएं,
दिल्ली कभी दुबई
की याद
बीच-बीच में मन
बहलायें !
माँ-पापा व
सास-ससुर सभी
प्रेमाशीष सहज ही
मिलता,
तुम दोनों का
अंतर सबके
नेह सुरभि से सदा
सँवरता !
कर्मठता से जीवन
पथ पर
उन्नति के
प्रतिमान बनाओ,
क्षमताओं का कर
प्रयोग इस
जग को सुंदर और
बनाओ !
Friday, January 18, 2019
जन्मदिन पर
जन्मदिन पर
मुखड़े पर मुस्कान थिरकती
दिल में जोश युवाओं सा है,
हाथों में कर्मठता समुचित
जीवन मुक्त हवाओं सा है !
शेफ कहलाना करें सार्थक
अनगिन लोगों को सिखलाया,
शहर, शहर, होटल, होटल जा
अपने बिजनस को फैलाया !
जीवनसाथी सदा साथ है
बेटियों के दिलों को बूझें,
भाइयों-बहनों के लाडले
यूएइ के रास्ते सूझें !
फूल खिलाये शाक उगाये
साइकलिंग कर वजन घटाया,
घंटों पहरों करी नौकरी
चिह्न थकान का इक न पाया !
जन्मदिवस कुछ कहने आया
इक दिन तो सिमटेगा डेरा,
भीतर जाकर उससे मिल लें
जिस घट लगने वाला फेरा !
शीश झुका कर भरे नयन से
करें शुक्रिया उस दाता का,
जिसने कोई कमी न छोड़ी
उसी अनाम परम ज्ञाता का !
Monday, November 12, 2018
तुम दोनों का आना
तुम दोनों का आना
जैसे शीतल पवन झकोरा
सहला जाता.. कुछ दे जाता,
या फिर कोई झरता झरना
भीनी सी फुहार बरसाता !
विमल प्रेम की धार बही थी
मधुर मिठाई पकवान संग,
हर मुद्रा हर भाव हृदय का
बना प्रकाश.. भरा था आंगन !
आतिश बाजी से गगन रँगा
जब गगनदीप उन्मुक्त उड़ा,
नये सुस्वादु व्यंजन, सज्जा
अतिथियों का आनंद बढ़ा,
बच्चों संग मित्र बन खेले
जीता उनको उपहारों से,
सबको एक नजर से देखा
बसा नहीं भेद कभी उर में !
तुम दोनों को प्रेम जोड़ता
ऐसे ही मुस्काते रहना,
ज्यों जन्मों के मीत मिले हों
एक हृदय दो तन हो रहना !
विवाह के बाद प्रथम बार दीपावली के अवसर पर जिनके यहाँ पुत्र और पुत्रवधू का आगमन
हुआ, यह कविता उन सभी परिवारों को समर्पित है.
Monday, August 6, 2018
जन्मदिवस पर
प्रिय भतीजी को जन्मदिन पर
ढेर सारी शुभकामनाओं सहित
डाक्टर बन कर नाम
कमाओ
सेवा की भावना हो मन
में,
इंटर्नशिप दिल से
पूरी कर
मिले दाखिला भी एमडी
में !
बचपन से ही हो
मेधावी
परिवार को गर्व है
तुम पर,
सदा उसूलों पर ही
चलती
श्रम करती निज
बलबूते पर !
मौज मनाती हैं जब
सखियां
तुम्हें लक्ष्य का
भान है रहता,
जीवन का जो उच्च
ध्येय है
दृष्टि के सम्मुख ही
रहता !
माँ-पापा को आदर्श
बनाकर
श्रेष्ठ राह पर तुम
चलती हो,
दोनों के परिवारों
में भी
प्रिय सभी की सदा
रही हो !
जन्मदिन पर बहुत
बधाई
ऐसे ही आगे बढ़ना है,
छिपे गर्भ में जीवन के
जो
अनुपम पन्नों को
पढ़ना है !
Monday, July 30, 2018
जन्मदिन पर
छोटी बहन के जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ
खिलखिलाती गुनगुनाती
एक धारा ज्यों ख़ुशी की,
प्रीत की ओढ़े चुनरिया
जीत सुंदर जिन्दगी की !
एक नगमा, ख्वाब कोई
एक हसरत मंजिलों की,
गूँजता स्वर प्रणव जैसे
हो चहक तुम पंछियों की
स्वर्ण सा उर बने कुंदन
ध्यान की पूँजी सहेजो,
सुखद भी हो और पावन
संपदा उर में समेटो !
जन्मदिन पर गा रहा दिल
खिल कुसुम महको जहाँ में
छाँव बन कर दो सहारा
मिले संगी जो राह में !
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