Monday, June 1, 2015

जन्मदिन पर शुभकामनायें


जन्मदिन पर शुभकामनायें 



चेहरे पर थिरकती है
सदाबहार एक मुस्कान
नयनों में तृप्ति का
महासागर लहराता
श्वेत केशों से सजा भाल
आभामय आनन
 बिन बोले ही सब कह जाता !

बरसों से वैसी ही ललक है भीतर
जीवन को जीने की पुलक निरंतर
लजीज भोजन रोज ही पकातीं
कुरकुरे, स्वादिष्ट परांठे
जीजाजी को खिलातीं !

समधियों से नेह बंधन निभाएं
बच्चों के बच्चों को
प्यार से हँसाए
पिता और भैया को
आदर जनातीं आयीं
छोटों पर स्नेह नीर
सदा ही लुटातीं आयीं 

शुभ दिवस शुभ घड़ी पुनः है आई
दीदी को जन्मदिन पर ढेरों बधाई !

Thursday, May 28, 2015

जन्मदिवस पर शुभकामनायें

जन्मदिवस पर शुभकामनायें 


जीवन ऐसा सफर है जिस पर
सुख-दुःख चलते साथ हमारे,
एक बिना रह पाए न दूजा
मिलकर दोनों राह संवारें !

तुमने भी इस मोहक पथ पर
बरसों पहले कदम बढ़ाए,
स्नेह छाया में माँ-बाबा की
भाई-बहन संग नगमे गाये !

हुई कल्पना सत्य, पाया
जब जीवन साथी मन भावन,
रुचियाँ एक, साम्य सोच में
बंधन बना अति ही पावन !

दी आजादी संग ममता के
आत्मविश्वास दिया बिटिया को,
एक पूर्ण व्यक्तित्त्व है माना
जाना नहीं अबोध सुता को !

श्रम करती हुई भी मुस्काती
अद्भुत साहस तुमने पाया,
जीवन के रस को चखने में
सदा स्वयं को आगे पाया !

इसी भांति सदा साहस भर
कर्त्तव्य पथ पर चलना,
दूर हटा बाधाएँ सारी
यूँ ही सदा हँसती रहना !


Monday, May 25, 2015

जन्मदिवस पर शुभकामनायें


जन्मदिवस पर शुभकामनायें


अर्धशतक की ओर बढ़ रहे जनाब
सेवा कर माँ की पाते सबाब,
चौंका देना है शौके मिजाज
खिलाते घरवालों के गालों पे गुलाब !

फूलों, पंछियों के अक्स उतारे
सज गयी जिनसे बच्चों की किताब,
नफासत पसंद, सूक्ष्म निगाहें
हर शै का खासा रखते हिसाब !

ढेरों पत्रिकाएँ बढ़ातीं घर का शबाब
टीवी को सुबहोशाम करते आदाब,
कलाकारों को बिठाया है दिल में
पूरे किये कई बचपन के ख्वाब !

घर से दफ्तर, दफ्तर से घर
श्रीमती को खुश रखते जनाब,
बिटिया को भेजा है नजरों से दूर
                    बिल फोन का क्यों बढ़े न बेहिसाब !                      


Friday, May 22, 2015

विवाह की वर्षगाँठ पर

öविवाह की वर्षगाँठ पर 

तुम्हें याद है
अग्नि की पावन वह ज्वाला
झुके नयन कंपित हाथों से
पहनायी सुंदर जयमाला
दो जीवन तब एक हुए थे
नव यात्रा पर कदम बढ़े थे !

तुम्हें याद है
õनन्हे पावों की वह आहट
अंतर्मन को छू ले ऐसा
मधुर हास्य मीठी तुतलाहट
पलक झपकते बरस बीत गए
बचपन के दिन युवा हो गए !

तुम्हें याद है
दुःख की घड़ियाँ मिलकर काटीं
सुख के स्वप्न संजोये कितने
कितने उत्सव साथ मनाये
संग-संग देखे सूर्योदय व
चान्दनी रातों में मुस्काए !

तुम्हें याद है
साथी अभी और चलना है
जीवन के इस नये मोड़ पर
उम्र के सूरज को बढना है
सम्बल देते एक दूजे को
जीवन ज्योति बन जलना है !


Tuesday, May 5, 2015

जन्म दिन पर

 जन्म दिन पर


अधरों पर मुस्कान खिली है
नयन चमकते, तन चन्दन सा,
 घुंघराले हैं केश रेशमी
जो भी देखे रहे देखता !

भीतर एक तलाश चल रही
बाहर सारी दुनिया घूमे,
दिल में प्रेम छलकता छल-छल
पशु-पक्षियों तक जा पहुँचे !

वर्षों से विदेश बना घर
अपना कमरा फिर भी भाए,
माँ के हाथों बने व्यंजन
 बचपन अब भी उसे बुलाए !

निडर भाव, आवाज में मिश्री
हँसी खनकते सिक्कों सी,
अति आधुनिक वस्त्र सजीले
व्यक्तित्व में एक परी सी !

कलम पर है पकड़ अनोखी
किस्से और कहानी गढ़ती,
मित्र मंडली बहुत बड़ी है
हक से सबके दिल में रहती !


Thursday, April 30, 2015

आदरणीय व प्रिय सिन्हा आंटी को श्रद्धासुमन

आदरणीय व प्रिय सिन्हा आंटी को श्रद्धासुमन


दुबली हो गयी काया
मुखड़े पर शांति का भाव एक समान
किसी को कष्ट दिए बिना
किया अपने इस जीवन से प्रयाण
याद आती हैं आपकी मुस्कुराहटें
दबी-दबी हँसी और तृप्ति का अहसास
हाँ, जीवन से भरपूर पाया आपने
सुविचारित, सुसंस्कृत जीवन की अधिकारिणी
बनी रहीं समर्पित पाठिका अंतिम क्षण तक
नहीं त्यागा देह को संवारना, सजाना
दिया जीवन को पूर्ण सम्मान
सदा चलकर समय पर.. उसको मान 
जन्म देता है संगीत को
एक लय बद्ध जीवन ही
दिलों में अपनों के
सुमधुर स्मृतियों को भी
आपका स्नेह बेशर्त था
हर निमन्त्रण आपका आग्रह भरा
साझा किया था अपनी यादों को
भागलपुर और पटना की बातों को
शांतिमय हो आगे का पथ आपका
यही है हमारे दिल की दुआ !

Wednesday, April 22, 2015

जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

 जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ


ऊँचा कद, व्यक्तित्व अनोखा
चौड़ा मस्तक, प्रखर है मेधा,
बचपन में थे बड़े सुदर्शन
नाम नरेश पिता ने दिया !

पढ़ने का है शौक बहुत
मोटा चश्मा चढ़ा आँख पर,
समाचार हों या सुडोकू
पढते पेपर इक इक अक्षर !

नई दिल्ली में बसे द्वारका
मेट्रो की महिमा मानें,
एमटीएनएल के सफल अधिकारी  
कर्म को ही पूजा जानें !

बिटिया को पढ़ाते दिल से
पी टी ए मीटिंग्स में जाते,
होम मिनिस्ट्री को खुश रखते
रिश्तेदारी सदा निभाते !

जन्मदिवस है आज आपका
दो पल याद करें थम कर,
कितनी दूर अभी जाना है
खुशियों से लें मन को भर !

अनिता निहालानी
१ दिसम्बर २०१०