Monday, July 1, 2019

भाभी के जन्मदिन पर



जन्मदिवस पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ

छोटे केश सांवला मुखड़ा
प्यारी सी मुस्कान सजी है 
बड़े प्रेम से स्वागत करतीं
चाहे जितनी बार मिली हैं

बिटिया की हैं बनी सहेली
सदा साथ जीवन साथी के,
हर सुख-दुःख में बनीं सहारा
किया सामना बड़े जोश से !

एक से एक नया फर्नीचर 
संवरा-सजा सदा हर कमरा,
सौन्दर्य की बड़ी परख है
हो चादरें या फिर परदा !

देख-भाल कर चुनती हैं वह
ड्रेस सेन्स भी पाया खूब,
सखियों संग की किटी पार्टी
किस्सों से भी मचायी धूम !

माँ के आशीर्वाद मिले हैं
भाई-भाभी का भी दुलार,
बहना बसी सदा अंतर में
ससुराल में मिला है प्यार

जन्मदिन पर ढेरों बधाई
ऐसे ही सदा मुस्काएं,
स्वप्न सभी ही शीघ्र पूर्ण हों
हम सब देते यही दुआएं !

Sunday, June 2, 2019

दीदी के लिए जन्मदिन पर



दीदी के लिए जन्मदिन पर 

घुंघराले रेशमी कुंतल, कुछ उलझे कुछ हैं सँवरे से
मुखड़े पर विश्वास अभय का, चमके जो सुख के मेकप से

वैरागी मन रह अलिप्त ही    
जग के सारे रोल निभाता,
न लेना उधो देना माधो
समय बिना योजना बिताता !

फक्कड़ तबियत सहज स्वभाव, खुशियों का इक मिला खजाना
बिना शर्त अब इस थाती को, अपने चारों ओर लुटाना

प्रकृति का सुसान्निध्य मिला है
नियमित सांध्य भ्रमण हैं करती,
यादों को मन के अलबम संग
नोट डायरी में भी करतीं !

ज्ञान वचन सुन, मथकर उनको, निज अनुभव में उन्हें परखतीं 
दीपक भाई, नीरू माँ संग, मुलाकात रोजाना करतीं

ओशो के आश्रम जा जाकर
यादों का गुलदान बनाया,
उनकी ख़ुशबू से जब तब फिर
फेसबुक का वाल महकाया !

बच्चे जब भी मिलने आते, पोती, नाती पर बलि जाती
जीजा जी की हर फरमाइश, तत्क्षण खुश हो पूरा करतीं

सत्य अनकहा एक असीम
भीतर सबके छिपा हुआ है
निज शब्दों में उसे उतारें
सद्गुरू का भी साथ मिला है

भांजी के जन्मदिन पर




भांजी के जन्मदिन पर 


भारत बसता हर धड़कन में, पूर्ण समर्पित परिवार को,
बसा नार्वे भी है दिल में, ग्लोबल सिटीजन माने खुद को !

कोमल केश बिछे काँधों तक
अधर गुलाबी, गहरी आँखें,
मुस्का देती बात-बात पर
खिल जाती हैं बरबस बाँछें !

 तीन शिशु आंचल में खेलें, खुद भी बच्चों जैसी नटखट,
हर कार्य में हाथ बंटाए, संग प्रिय के मधुमय जीवन !

सास-ससुर का सहयोग है
है बड़ी ही किस्मत वाली,
दादा-दादी की पा आशीष
बच्चों की भी खुली लाटरी !

सामाजिक मुद्दों पर भी वह, अपनी निश्चित राय रखती,
सखियों में अति लोकप्रिय है, याद उन्हें बरसों तक करती!

सेहत का भी ध्यान बहुत है
कैलोरी, वजन पर नजरें,
गहरी मौलिक बातें खोजे
खाने में हैं थोड़े नखरे !

जन्मदिन पर ढेर दुआएं, यूँ तो याद सदा तुम आती,
गोदी में था जिसे खिलाया, वही बालिका बन मुस्काती !

अब भी सिडनी की सड़कों पर
कार चलाती तेज गति से,
नये युग की वर्किंग वुमेन
निर्णय लेती सहज मति से !

Sunday, February 10, 2019

शुभकामनायें



जन्मदिन पर 

घर से दूर एक नया घर बनाया
जीवन साथी को भी विदेश में ही पाया
पर भारत बहता है अब भी शिराओं में
आदर्श झलकता है बचपन के संस्कारों में 
दुनिया के सबसे अमीर मुल्क में है बसेरा
हर साल एक बार तो लगता ही है फेरा
जन्मदिवस पर स्वीकारो बधाई
खुशियों की बरसात भिगोने आई




भांजे के जन्मदिन पर 

Friday, February 1, 2019

है कृतज्ञ हो जाने का दिन



जन्मदिन पर



माँ की उंगली पकड़ के तुमने
जिस दिन चलना सीखा था,
पिता के कांधे पर पर चढ़ कर
इस दुनिया को देखा था !

आज स्मरण करने का दिन वे 
आगे पीछे घूमा करते,
बात तुम्हारे मुख से निकली
बड़े प्यार से पूरा करते !

आज खड़ी निज पैरों पर तुम,
उनको तुम पर गर्व हो रहा,
एक समर्थ सजग बिटिया को
देख-देख कर हर्ष हो रहा !

है कृतज्ञ हो जाने का दिन
हाथ जोड़ मन्दिर में जाना,
समृद्धि वैभव जो भी पाया
धन्यवाद दे उसे जताना !

जन्मदिवस पर यह भी सोचें
नूतन वर्ष मिला जो आगे,
बने योजना कुछ ऐसा हो
जिससे अंतर्मन यह जागे !

Sunday, January 20, 2019

शुभकामनायें






विवाह की वर्षगांठ पर 

दिल उमगे मुस्कान अधर पर 
चौदह वर्ष का सँग साथ है,
प्रिय बिटिया मिली परियों सी
निशदिन ही हाथ में हाथ है !

देहरादून देव भूमि में
परिवार संग मिलन मनाएं,
दिल्ली कभी दुबई की याद
बीच-बीच में मन बहलायें !

माँ-पापा व सास-ससुर सभी
प्रेमाशीष सहज ही मिलता,
तुम दोनों का अंतर सबके
नेह सुरभि से सदा सँवरता !

कर्मठता से जीवन पथ पर
उन्नति के प्रतिमान बनाओ,
क्षमताओं का कर प्रयोग इस
जग को सुंदर और बनाओ !

Friday, January 18, 2019

जन्मदिन पर




जन्मदिन पर


मुखड़े पर मुस्कान थिरकती
दिल में जोश युवाओं सा है,
हाथों में कर्मठता समुचित
जीवन मुक्त हवाओं सा है !

शेफ कहलाना करें सार्थक
अनगिन लोगों को सिखलाया,
शहर, शहर, होटल, होटल जा
अपने बिजनस को फैलाया !

जीवनसाथी सदा साथ है
बेटियों के दिलों को बूझें,
भाइयों-बहनों के लाडले
यूएइ के रास्ते सूझें !

फूल खिलाये शाक उगाये
साइकलिंग कर वजन घटाया,
घंटों पहरों करी नौकरी
चिह्न थकान का इक न पाया !

जन्मदिवस कुछ कहने आया
इक दिन तो सिमटेगा डेरा,
भीतर जाकर उससे मिल लें
जिस घट लगने वाला फेरा !

शीश झुका कर भरे नयन से
करें शुक्रिया उस दाता का,
जिसने कोई कमी न छोड़ी
उसी अनाम परम ज्ञाता का !