Friday, July 11, 2025

जीवन में इक लय व छंद है

आदरणीय जीजाजी के लिए 

 जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाओं सहित 


मुख पर संतोष भरी मुस्कान

बन गयी है आपकी पहचान, 

छोटी-बड़ी ज़रूरत का हर

दीदी-बच्चे रखते हैं ध्यान !


तन थक जाए कभी ज़रा सा 

 पर मन का हौसला बुलंद है, 

 वरदान मिला है दीर्घायु का

जीवन में इक लय व छंद है !


आँगन में बगिया मुस्काए,

 हर मौसम कुछ नया दे जाए,

 आम, लीची, लुकाठ, करी पात 

 नींबू, पुदीना सुरभि लुटाए !

 

भोर में पंछी गीत सुनाते 

घर भर देती मधुर गुंजार,

संबंधों में स्नेह बह रहा  

पोती-नातिनों की चहकार !


लोहड़ी, होली, या दिवाली 

हर उत्सव मिलकर मनाते

 ऑनलाइन खेलों के संग 

 शॉपिंग का भी लुत्फ़ उठाते !


जीवन जैसे शांत समंदर

 हर लहर कहे कितना सुंदर,

 साथ मिला जो सच्चा, पावन

 उससे ही पथ हुआ यह भावन !


 यही कामना हम सब की, हो 

जन्मदिवस हर साल निराला,

 रहें आप स्वस्थ और  सानंद 

 खुशियों का हो संग उजाला !




Tuesday, July 8, 2025

दिल में ले भारत की यादें

प्रिय भाभी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित 


दिल्ली की गर्मी से राहत 

मिली शीतल मंद हवाओं में, 

सागर के सुंदर तटों पर 

कनाडा की मस्त फ़िज़ाओं में !


नीले नभ पर श्वेत बदलियाँ 

सागर का जल भी नीला है, 

हाथ लिए हाथों में अपने 

जीवन साथी साथ खड़ा है !


सजे-धजे सुंदर वस्त्रों में 

स्वच्छ रास्तों पर चलना है, 

दिल में ले भारत की यादें 

नई स्मृतियों से मन भरना है !


बिटिया के घर जाकर यूँ भी 

हर दिन नया-नया लगता है, 

जन्मदिवस तो ख़ास तौर पर 

इस बार अनोखा लगता है !


हम सब देते ढेर दुआएँ 

ऐसे ही मुस्काती रहना, 

आने वाले हर इक पल में 

प्रीत के नग़मे गाती रहना !

Monday, June 2, 2025

एक अदृश्य लोक से आतीं

आदरणीय व प्रिय दीदी के लिए 

जन्मदिन पर ढेर सारी 

शुभकामनाओं के साथ 


जीवन का जो मर्म जानतीं 

तृप्ति का जो धर्म जानतीं, 

बनी अजस्र प्रेम की धारा 

निष्काम जो कर्म जानतीं !


सदा प्रफ़्फुलित अंतर जिनका 

बेशर्त निज प्रेम लुटातीं, 

जीवन के इस आयोजन में 

रह असंग भूमिका निभातीं !


सत्य, प्रेम, ज्ञान के पथ पर 

हो नि:शंक वर्षों से बढ़तीं, 

एक अदृश्य लोक से आतीं 

किरणों को दामन में भरतीं !


ऐसे ही घर रहे आपका 

कृपा बरसती प्रकृति माँ की, 

फूलों जैसा खिला रहे मन 

लें बधाई इस पावन दिन की !



Sunday, January 26, 2025

साहस भरा हर श्वास में

माँ की पुण्य स्मृति को श्रद्धा सुमन 


उन्होंने हमें दिया जनम 

पोषण किया कर हर जतन, 

उस स्नेह ममता मूर्ति  को

कर याद हम करते नमन !


पढ़ती रहीं पढ़ाती भी 

बुनती सदा  सिखाती भी, 

साहस भरा हर श्वास में 

वह इक आत्मा स्वतंत्र थीं !


घूमीं बहुत पर्वत चढ़ीं 

दीपक जो छह जला गयीं, 

पिता संग माँ हर हाल में 

तृप्ति  का रस पिला गयीं  !


हम याद करते हैं उन्हें 

शुभ प्रेम अंतर में भरे, 

उन्हीं  रास्तों पर चल सकें 

जीवन से निज दिखा गयीं !



Wednesday, January 8, 2025

प्रेम का आकाश

विवाह की वर्षगाँठ पर 

असीम है जैसे मेरा प्रेम 
तुम्हारे लिए 
वैसे ही तुम्हारा नहीं होगा 
यह मानने का कोई कारण तो नहीं  
वर्षों का साथ है पर अब भी 
कोई नयी बात पता चल जाती है 
ज़िंदगी रोज़-रोज़ कोई रहस्य 
खोलती जाती है 
अनंत है प्रेम का आकाश
उसके हज़ारों हैं रंग 
एक ही बात को कहने को
 हज़ारों हैं ढंग  
कोई छोटा सा इशारा ही 
काफ़ी है प्रेम के 
किसी न किसी आयाम को 
जतलाने के लिए 
नहीं चाहिये मन को कोई आश्वासन 
साथ होना ही काफ़ी है 
दिल का हाल 
बतलाने के लिए !


Tuesday, December 3, 2024

कितने दिन थे राम के पास

जन्मदिन पर

बीता बरस जन्मदिन आया 

 नदी समय की बहती जाती, 

बड़े मज़े की बात यही है 

हर बार यही धड़कन गाती !


कौन देखता रहकर भीतर 

समय बीतता वही न बीते, 

बरसों में यह तन शिथिल हुआ  

पर मन के घट कभी न रीते !


स्वप्न समान सभी अनुभव अब 

इस पल जाग जरा देखें हम, 

जाता हुआ वर्ष यह कहता 

क्या करना क्या नहीं करो तुम !


हर पीड़ा गहराई देती 

हर आनंद नूतन विश्वास, 

कितने दिन माया ने घेरा 

कितने दिन थे राम के पास !


बदली भरे कई दिन आये 

कितने सूरज चमके नभ में, 

कई अडिग संकल्प भी लिए 

बिटिया की शादी में उनमें !


भीतर गहन मौन भी देखा 

बाहर दुनिया-देश घूमते, 

हर मुश्किल का हल भी सूझा 

मन जब था अंतर उत्सव में !


Thursday, November 28, 2024

घुल मिल गये जैसे नीर-क्षीर

प्रिय पुत्र व पुत्रवधू के लिए

वर्षों बीते पलक झपकते, याद आ रही हैं वह घड़ियाँ, 
संग-संग जीवन का वादा, दिल में फूटीं थीं फुलझड़ियाँ  !

अग्नि देव व अन्य देवों की, साक्षी में वचन दोहराया, 
आशीर्वाद पाया बड़ों का,  रिश्तों में प्रेम लहराया !

क्या अर्थ है मधुर बंधन का, समय के साथ स्पष्ट हो रहा, 
वरमाला डाली थी उस दिन, अहसास हर पल हो रहा  !

सम्मान से  किया था स्वागत, इक-दूजे के परिवारों का, 
घुल मिल गये जैसे नीर-क्षीर,  अब दो मिल गये माता-पिता !

आपस में सहयोगी बन कर, शुभ कार्य सदा मिल कर करते, 
दोनों के जॉब की खूबियाँ,  स्वीकारी हैं पूरे दिल से !

पानी जैसे दो नदियों का, मिलकर एक हुआ बहता है, 
पहले दो थे एक हुए फिर, भेद नहीं कोई रहता है !

भिन्न-भिन्न था कितना कुछ पर। ‘हम’ होते ही हो गया हमारा, 
एक इकाई बन कर रहते, मेरा सब कुछ हुआ तुम्हारा ! 

प्रेम ह्रदय का सदा समर्पित, अहंकार न मध्य में आता, 
पहला दूजे के सुख-दुख में, पूरे दिल से साथ निभाता !

मैत्री का ही नाता पनपे,  एक मना ले दूजा रूठा, 
हँसी सदा झलके मुखड़े पर, कोई बड़ा न कोई छोटा !